'भारत के साथ संबंधों को महत्वपूर्ण मानता है अमेरिका'

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Friday, October 18, 2013-12:14 PM

वाशिंगटन: अमेरिका के एक जाने-माने विद्वान का कहना है कि उभरते चीन के प्रभावों से निपटने के मद्देनजऱ अमेरिका, भारत के साथ अच्छे संबंधों को आवश्यक मानता है। अपनी नई पुस्तक ‘नो एक्जिट फ्रॉम पाकिस्तान’ में डेनियल मार्की ने कहा, ‘‘भारत को विकास और शक्ति हासिल करने के अपने लक्ष्यों को पाते देखना संभवत: अमेरिका के हित में है। कुल मिलाकर यदि नई दिल्ली, वाशिंगटन के साथ कभी औपचारिक गठबंधन नहीं चाहता है या नहीं स्वीकार करता है तो भी यह बात सत्य होगी।’’

मार्की ने कहा कि बुश और ओबामा दोनों प्रशासनों ने भारत के साथ अच्छे संबंधों को उभरते चीन के प्रभावों के प्रबंधन के लिए आवश्यक मानने का सही रूख अपनाया। उन्होंने कहा कि अपनी बढ़ती शक्ति और अमेरिकी व्यवसायियों एवं नीति निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर खींचने के अलावा भारत, चीनी शासन मॉडल के मुकाबले बहुलवादी और लोकतांत्रिक विकल्प मुहैया कराता है। उन्होंने कहा कि भारत की जनसंख्या युवा है और तेजी से बढ़ रही है, इसलिए जिन इलाकों में आकार महत्व रखता है।

वहां के लिए भारत बहुत महत्वपूर्ण है। भारत द्वारा जनसंख्या के मामले में 2025 तक चीन को पीछे छोड़ देने की संभावना है। मार्की ने कहा, ‘‘सैन्य क्षेत्र में भारत कई क्षमताओं में चीन से काफी पीछे है, लेकिन अमेरिका के जापान, कोरिया या आस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों के विपरीत भारत की सेना के पास बड़ी मानवशक्ति है तथा उसकी सभी सेवाएं उपकरणों और तकनीक की खरीद में करोड़ों डॉलर निवेश कर रही हैं।’’ उन्होंने साथ ही कहा कि भारत के विकास करने की उम्मीद है, लेकिन इसे लेकर पूर्ण विश्वास नहीं है।

भारत के विकास में मुख्य बाधाएं आंतरिक हैं जैसे कि प्रभावहीन सरकारी संस्थान, गरीबी, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा और राजनीतिक भ्रष्टाचार। मार्की ने कहा कि पाकिस्तान, भारत के विकास और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा बाह्य खतरा है। भविष्य के मद्देनजऱ पाकिस्तान की अपनी कमजोरी भी भारत के लिए वास्तविक खतरा पैदा करेगी। यदि पाकिस्तान में गृह युद्ध जैसे हालात पैदा होते हैं तो भारत में लाखों शरणार्थियों के आने की संभावना है।

इससे भी खतरनाक बात यह है कि जो लोग अपने हिंसक संघर्ष को पाकिस्तान से बाहर भारत में मुस्लिम बहुल समुदायों में ले जाना चाहते हैं, वह भी भारत के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा कि 1960 के दशक से पाकिस्तान कई कारणों से चीन का उपयोगी सहयोगी रहा है। 1990 के दशक से चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार आया है और भारत और पाकिस्तान के बीच वैमनस्यता को प्रोत्साहित करने के लिए क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है और संकट के समय अपने मित्र इस्लामाबाद पर दवाब डालता रहा है ।

 


 


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