चीन पहुंचे प्रधानमंत्री, 'सीमा सहयोग पर भारत-चीन करेंगे ऐतिहासिक करार'

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Wednesday, October 23, 2013-10:01 AM

बीजिंग: भारत और चीन हाल ही में लद्दाख की देपसांग घाटी में बनी सैन्य टकराव जैसी स्थितियों से बचने के लिहाज से सीमा पर सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक समझौता कर सकते हैं लेकिन एक उदार वीजा प्रणाली की योजना मुश्किल लगती है।
   
तीन दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। वह कल चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग से मुलाकात करेंगे जिसके बाद सीमा रक्षा सहयोग सहमति (बीडीसीए) पर दस्तखत किये जाएंगे। लद्दाख में इस साल की शुरूआत में देपसांग के घटनाक्रम के संदर्भ में इस समझौते को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देपसांग घाटी में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों ने घुसपैठ की थी और तीन हफ्तों तक वहां रके रहे थे।
   
हालांकि इस तरह के संकेत हैं कि दोनों देशों के बीच चीनवासियों के लिए उदार वीजा संबंधी सहमति पर दस्तखत होने की संभावना नहीं है। इसे एक तरह से ‘जैसे को तैसे’ के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि हाल ही में चीन ने अरणाचल प्रदेश के दो भारतीय तीरंदाजों को नत्थी किया हुआ (स्टेपल्ड) वीजा दिया था।

बीडीसीए पर दस्तखत होने का रास्ता साफ होने का संकेत देते हुए सूत्रों ने कहा, ‘‘अभी परिणाम के बारे में नहीं पूछिए। हम आपको कल ब्योरा देंगे।’’ सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर टकराव की स्थितियों से बचने के लिए विश्वास बहाली के कदमों के तहत पिछले हफ्ते बीडीसीए को मंजूरी दी थी। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की ओर से कई बार घुसपैठ हुई हैं। बीडीसीए में दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच भारत और पाकिस्तान की तर्ज पर एक हॉटलाइन स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।

सिंह और ली के बीच बातचीत के बाद समझौते को मंजूरी मिलने की संभावना है। ली प्रधानमंत्री के लिए भोज का आयोजन भी करेंगे। दोनों नेताओं की पांच महीने के अंदर यह दूसरी मुलाकात है। इससे पहले मई में चीनी प्रधानमंत्री भारत यात्रा पर आये थे। राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी कल सिंह के लिए रात्रिभोज देंगे।

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