किशोरावस्था में मां बनने की बजाए कम से कम....

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Wednesday, October 30, 2013-4:57 PM

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यदि भारत में लड़कियां किशोरावस्था में मां बनने के बजाए कम से कम 25 वर्ष की आयु तक पढ सकें और नौकरी कर सकें तो देश अपनी आर्थिक उत्पादकता में प्रति वर्ष सात अरब 70 करोड़ डॉलर का इजाफा कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष ने ‘बचपन में मातृत्व: किशोरावस्था में गर्भधारण की चुनौती का सामना’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की है।

इसमें कहा गया है कि गरीब देशों में प्रतिवर्ष 73 लाख से अधिक लड़कियां 18 वर्ष की आयु से पहले ही मां बन जाती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ बचपन में मां बनना खासकर विकसित देशों में एक बड़ी वैश्विक समस्या है।’रिपोर्ट में बताया गया है कि इन 73 लाख लड़कियों में से 20 लाख लड़कियों की आयु 14 वर्ष या इससे कम होती है।

ये लड़कियां स्वास्थ्य संबंधी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो जाती हैं और कई लड़कियों की बच्चे को जन्म देने के दौरान मौत हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि जल्दी गर्भधारण से न केवल लड़की के स्वास्थ्य, शिक्षा और अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है बल्कि वह अपनी क्षमताओं का एहसास भी नहीं कर पातीं और इससे बच्चे के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है।

 


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