भारत-चीन सेना का दस दिन का सैन्य अभ्यास शुरू

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Wednesday, November 06, 2013-12:12 AM

बीजिंग: भारत और चीन के बीच सीमा रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के कुछ दिनों बाद आज दोनों देशों की सेना ने 10 दिन का आतंकवाद विरोधी साझा सैन्य अभ्यास आरंभ किया। यह अभ्यास पांच वर्षों के अंतराल के बाद हो रहा है। इस अभ्यास को ‘हैंड इन हैंड 2013’ नाम दिया गया है।

यह चीन के शिचुआन प्रांत के मियाओरगंग में किया जा रहा है। दोनों देशों ने 150-150 सैनिकों को तैनात किया है। इसमें भारतीय सेना की 16 सिख लाइट इनफेंटरी डिवीजन के सैनिक और चीन के पीएलए की प्रथम बटालियन इनफेंटरी डिवीजन के सैनिक शामिल हैं। भारतीय रक्षा विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार उद्घाटन समारोह के दौरान चीनी पक्ष ने मार्शल आर्ट कुंगफू का प्रदर्शन किया तो भारतीय पक्ष ने पंजाबी गटका मार्शल आर्ट दिखाया।

भारतीय सेना के पर्यवेक्षक समूह के अगुवा लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया के साथ अभ्यास आरंभ होने का ऐलान करते हुए चीन के दल के प्रमुख यंग जिनशान ने कहा कि आतंकवाद एक वैश्विक चुनौती है तथा चीन एवं भारत भी समान रूप से खतरे का सामना कर रहे हैं। भाटिया ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग और मित्रता के लिए यह अभ्यास सटीक शुरूआत है। अभ्यास के दौरान भारत और चीन के सैनिक रणनीतिक संकेतों, गिरफ्तारी एवं रक्षा, बंधकों को मुक्त कराने तथा संयुक्त हमला करने को लेकर अभ्यास करने के साथ ही आतंकवाद के खिलाफ सम्रग तैयारियों का प्रदर्शन करेंगे।

जिनशान ने सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ से कहा कि इस सैन्य अभ्यास का मकसद आतंकवाद विरोधी अनुभवों का आदान प्रदान करना, परस्पर समझ एवं विकास तथा दोनों सेना के बीच सहयोग को बढ़ाना है। इस अभ्यास पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने कहा, ‘‘इस साल की शुरूआत से भारत-चीन के संबंधों में नयी प्रगति हुई है। सैन्य क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग में सघन विकास हुआ है। सैन्य अभ्यास देशों के बीच राजनीतिक एवं परस्पर विश्वास के बढऩे का प्रदर्शन भी है। हम इस अभ्यास के सफल होने की कामना करते हैं।’’

चीन और भारत ने साल 2007 में यूनान प्रांत में पहला वार्षिक आतंकवाद विरोधी अभ्यास किया था। 2008 में दूसरा अभ्यास कर्नाटक में हुआ था। अगले चरण का अभ्यास स्थगित कर दिया गया था क्योंकि चीन ने जम्मू-कश्मीर में सैनिकों का नेतृत्व करने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी को वीजा देने से मना कर दिया था। पिछले महीने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीजिंग दौरे पर दोनों देशों ने सीमा रक्षा सहयोग समझौते (बीडीसीए) पर हस्ताक्षर किया। इस समझौते से सीमा पर तनाव से संबंधित मुद्दों का प्रभावी ढंग से निवारण करने में मदद मिलेगी।


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