पाकिस्तान तालिबान में वर्चस्व की लड़ाई जोर पर, खालिद हक्कानी नया मुखिया

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Thursday, November 14, 2013-11:48 PM

इस्लामाबादः पाकिस्तान में सक्रिय कुख्यात आतंकवादी संगठन तहरीक ए तालिबान या पाकिस्तान तालिबान (टीटीपी) के शीर्ष कमांडर हकीमुल्ला महसूद के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद संगठन में वर्चस्व को लेकर आपसी संघर्ष शुरू हो गया। इस संघर्ष के कारण पाकिस्तानी पंजाब और अन्य इलाकों में आतंकवादी घटनाओं में इजाफा होने के आसार काफी बढ गए हैं।

खुफिया सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान तालिबान ने महसूद की मौत के बाद स्वात घाटी के कट्टर कमांडर मुल्ला फजलुल्लाह को नया कमांडर घोषित किया था लेकिन उसके अफगानिस्तान में होने के कारण खालिद हक्कानी को कार्यवाहक कमांडर घोषित किया गया है। हक्कानी पाकिस्तान तालिबान में शामिल होने से पहले अपना आतंकवादी संगठन हक्कानी तालिबान संचालित कर रहा था। उसे भी फजलुल्लाह की तरह ही कट्टर माना जाता है। हक्कानी को पूर्व शीर्ष कमांडर महसूद का करीबी माना जाता है।

सूत्रों के अनुसार हक्कानी ने तीन आत्मघाती हमलों को अंजाम दिया है और उसके खाते में मई 2011 में खैबर पख्तूनख्वा के शबकादर इलाके में 80 लोगों की हत्या का आरोप भी शामिल है। इस हमले में कई सैनिक और रंगरूट मारे गए थे। गत साल अवामी नेशनल लीग के नेता बशीर अहमद बिलौर की आत्मघाती हमले में हत्या करने के पीछे भी उसका ही हाथ माना जाता है। लेकिन पाकिस्तान तालिबान के मुखिया में हुआ यह बदलाव बिना किसी वजह के नहीं माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार फजलुल्लाह के प्रमुख घोषित करने से संगठन में दरार आ गई है और हक्कानी को दी गई कुर्सी उसी दरार को पाटने की कोशिश है।

पाकिस्तान तालिबान में कई स्थानीय कट्टर संगठन शामिल हैं और इसी वजह से सबके लक्ष्य भी अलग अलग हैं। महसूद ने पाकिस्तान की सरकार के साथ शांति वार्ता पर भी अपनी मुहर लगाई, लेकिन फजलुल्ला ने प्रमुख पद पर अपने नाम की घोषणा के साथ ही अपने कडे़ तेवर का परिचय देते हुए किसी प्रकार की वार्ता से इन्कार कर दिया था। खुफिया सूत्रों के अनुसार दक्षिणी वजीरिस्तान में गत सात नवंबर को तालिबान की शूरा परिषद में संगठन के प्रमुख के रूप में फजलुल्ला के नाम की घोषणा के साथ ही कई कमांडर गुस्से में तत्काल ही बैठक से उठ गए।

इन विद्रोही कमांडरों ने फजलुल्ला को 'तालिबान के नेतृत्व का अंत' कहा लेकिन कई कमांडरों ने फजलुल्ला को अपना नेता माना और नए आतंकवादी घटनाओं की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी। फजलुल्ला के प्रमुख बनने से महसूद कबीले के लोग भी नाराज हो गए। हकीमुल्ला महसूद के प्रमुख रहने पर वे पाकिस्तान तालिबान को अपने कबीले का संगठन मानते थे इसीलिए फजलुल्ला के हाथ में सत्ता चले जाने से उन्हें बडी कोफ्त हुई। महसूद कबीला फजलुल्ला को बाहरी आदमी मानता है और इस पर फजलुल्ला की अनुपस्थिति ने मामले को और भी पेचीदा बना दिया है।


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