ईरान परमाणु कार्यक्रम मसला, अमेरिकी तेवर पडे़ नरम

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Friday, November 15, 2013-11:27 PM

वाशिंगटनः अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम के मसले पर अपनी त्यारियां थोडी ढीली करके उस पर नए प्रतिबंध लगाने की नीति को गैर जरूरी बताया है। इससे पहले तक ईरान के मुद्दे पर ओबामा प्रशासन सख्त दिख रहा था। साथ ही अंतराष्ट्रीय परमाणु उर्जा आयोग (आईएईए) का रूख भी कुछ अलग था लेकिन इन दोनों ने अब अपने सुर बदल लिए हैं।

ओबामा प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के समाधान के लिए कूटनीतिक रास्ता अख्तियार करने की वकालत करनी शुरू कर दी है। ईरान की परमाणु गतिविधि पर शिकंजा कसने के लिए पहले से ही अमेरिका और अन्य देशों ने कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं लेकिन अब ओबामा प्रशासन ने और अधिक प्रतिबंध लगाने की नीति को बिल्कुल बकवास करार दिया है।

श्री ओबामा ने कहा है कि उनके प्रशासन का लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार संपन्न बनाने से रोकना है। उनके मुताबिक ईरान पर लगे मौजूदा प्रतिबंध काफी हैं क्योंकि इसकी वजह से उसे काफी आर्थिक घाटा हुआ है। इसी घाटे के कारण ईरान आज बातचीत के लिए तैयार हुआ है। पिछले साल ईरान की अर्थव्यवस्था में पांच फीसदी की गिरावट हुई थी।

साथ ही श्री ओबामा ने ईरान को अपने बयान के जरिये चेतावनी भी दी है कि अगर वह परमाणु कार्यक्रम का कूटनीतिज्ञ हल निकालने के प्रति गंभीर नहीं दिखा तो उस पर और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

इधर आईएईए ने भी ईरान के उस दावे को सही बताया जिसमें उसने कहा था कि वह अपने यूरेनियम संवदर्धन कार्यक्रम में पिछले तीन महीने के दौरान धीमी गति से कटौती कर रहा है। उल्लेखनीय है कि ईरान से फिलहाल विश्व की छह महाशक्तियां ब्रिटेन, अमेरिका, चीन, फ्रांस, जर्मनी और रूस की बातचीत जारी है। इन देशों के बीच जेनेवा में 20 नवंबर से  फिर वार्ता का दौर शुरू होगा। इससे पहले हुई वार्ता निष्फल रही थी।


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