मालदीवः दबाव के चलते मोहम्मद वहीद ने राष्ट्रपति पद छोड़ा

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Friday, November 15, 2013-11:57 PM

माले: मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण के मतदान की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मोहम्मद वहीद ने आज पद छोड़ दिया। अंतराष्ट्रीय दबाव के बीच उन्होंने यह कदम उठाया है। वहीद फरवरी 2012 में मालदीव के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित पहले राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के पद से हटने के बाद राष्ट्रपति बने थे।

बीते 10 नवंबर को कार्यकाल पूरा होने के बाद से उन पर भारत तथा पश्चिमी देश पद छोडऩे का दबाव बना रहे थे। वहीद ने मीडिया से कहा कि वह सिंगापुर के निजी दौरे पर जा रहे हैं। समाचार पोर्टल ‘हवीरू’ के अनुसार वहीद ने कहा कि वह स्वदेश लौटेंगे, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वह कब लौटेंगे। बीते बुधवार को राष्ट्रमंडल मंत्रीस्तरीय कार्रवाई समूह (सीएमएजी) ने मालदीव को समूह से बाहर कर दिया था।

सीएमएजी ने इस बात पर ‘गहरी निराशा’ जताई थी कि वहीद का कार्यकाल पूरा होने से पहले मालदीव में नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो सका। वहीद ने शुरू में संकेत दिया था कि नया राष्ट्रपति चुने जाने तक वह पद पर बने रहेंगे। यहां राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण का मतदान कल होने वाला है। नशीद और अब्दुल्ला यामीन में से किसी एक को लोग मालदीव का अगला राष्ट्रपति चुनेंगे। पहले चरण का मतदान बीते नौ नवंबर को हुआ था और दूसरा चरण 10 नवंबर को प्रस्तावित था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसे 16 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया था।

मालदीव में यह चुनाव बीते सितम्बर महीने से राष्ट्रपति चुने जाने का तीसरा प्रयास है। इससे पहले दो चुनाव विफल रहे हैं। बीते सात सितम्बर को राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान हुआ था, लेकिन मतदाता सूची में गड़बड़ी का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत ने इस चुनाव को रद्द कर दिया था। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने 19 अक्तूबर को चुनाव कराने का प्रयास किया, लेकिन शीर्ष अदालत की सख्ती के कारण यह संभव नहीं हुआ।

वहीद ने कल रात टेलीविजन के जरिए किए संबोधन में दावा किया कि उनकी सरकार ने विदेशी दबाव में झुकने से इंकार किया और देश की संवैधानिक संस्थाओं की व्यवस्था और कानूनी प्रारूप को बरकरार रखा। उन्होंने कहा कि लोग यह महसूस कर सकते हैं कि सरकार कमजोर थी, लेकिन अगर सरकार ने धैर्य और सामंजस्य के साथ काम नहीं किया होता तो देश आज इस स्थिति तक नहीं पहुंच पाता। भारत ने दूसरे चरण के मतदान के 16 नवंबर तक स्थगित किए जाने को लेकर निराशा जताई और आग्रह किया था कि नव निर्वाचित राष्ट्रपति को जल्द से जल्द शपथ दिलाई जाए।


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