चोगम: छाया रहा मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों का मुद्दा, कैमरन ने दिया अल्टीमेटम

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Saturday, November 16, 2013-11:14 PM

कोलंबो: श्रीलंका में मानवाधिकार के उल्लंघन के आरोपों का साया राष्ट्रमंडल राष्ट्राध्यक्षों की बैठक (चोगम) से इतर मेजबान राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का पीछा करता रहा और दूसरी ओर ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने श्रीलंकाई सरकार को इन आरोपों की आगामी मार्च तक विश्वसनीय जांच कराने का अल्टीमेटम दिया।

कैमरन ने कहा कि इस अवधि तक विश्वसनीय जांच कराने में नाकाम रहने पर वह अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करेंगे। राजपक्षे ने तत्काल कैमरन की मांग खारिज कर दी। श्रीलंका सरकार ने कहा कि वह ‘दबाव’ में नहीं आएगी और अंतरराष्ट्रीय जांच की इजाजत नहीं देगी। संवाददाता सम्मेलन के दौरान राजपक्षे ने कैमरन की मांग को खारिज करते हुए कहा, ‘‘यह उनका विचार है। यह लोकतंत्र है। वह जो कहना चाहते हैं, कह सकते हैं। शीशे के मकानों में रहने वालों को दूसरे पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए।’’

वह कुछ देशों में व्यवस्था परिवर्तन और बाद के हालात के हवाला देकर की गई कार्रवाइयों के संदर्भ में ब्रिटेन पर परोक्ष निशाना साधते नजर आए। जब एक ब्रिटिश पत्रकार ने सवाल किया कि वह कैमरन का हवाला दे रहे हैं, तो श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मैंने किसी का नाम नहीं लिया है। आप इसे अपने और अपने प्रधानमंत्री से जोड़कर मत देखिए।’’ जाफना की यात्रा के बाद कैमरन ने श्रीलंका को एक स्वतंत्र जांच आयोग गठित करने के लिए मार्च तक का समय दिया और कहा कि ऐसा न होने पर वह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग से लिट्टे से युद्ध के अंतिम चरण में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के आरोपों की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करेंगे। युद्ध से जर्जर जाफना के ऐतिहासिक दौरे से लौटने के बाद कैमरन ने बीती रात श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मुलाकात की। श्रीलंका के 1948 में ब्रिटेन से स्वतंत्र होने के बाद से कैमरन जाफना की यात्रा करने वाले पहले शासन अध्यक्ष हैं।

कैमरन ने कहा कि निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच तथा तमिलों के साथ सुलह सहमति और उनके पुनर्वास के सहित सभी मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच ‘खुली’ बातचीत हुई।  उन्होंने यहां चोगम सम्मेलन से अलग एक संवाददाता सम्मेलन में कहा ‘‘मैंने राष्ट्रपति राजपक्षे से कहा कि (लिट्टे के खिलाफ) युद्ध के आखिर में हुए घटनाक्रम की मार्च के अंत तक विश्वसनीय, पारदर्शी और स्वतंत्र आंतरिक जांच की जरूरत है।

अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं अपने पद का उपयोग संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में जाने और एक स्वतंत्र जांच के लिए अधिकार आयुक्त के साथ काम करने के लिए करूंगा।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें स्वतंत्र जांच के लिए मार्च तक इंतजार करना चाहिए, कैमरन ने बताया कि राष्ट्रपति ने उनसे कहा कि उन्हें कुछ समय चाहिए क्योंकि वे लोग अभी भी युद्ध के प्रभाव से उबर रहे हैं। ब्रिटिश राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने इस बात को स्वीकार कर लिया कि श्रीलंका को सुलह सहमति के लिए समय की जरूरत है।


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