धार्मिक भेदभाव मामले में कंपनी को 50,000 डॉलर का जुर्माना

  • धार्मिक भेदभाव मामले में कंपनी को 50,000 डॉलर का जुर्माना
You Are HereInternational
Wednesday, November 20, 2013-3:21 PM

न्यूयॉर्क: न्यूजर्सी में कारों के एक डीलरशिप कंपनी को सिर्फ दाढ़ी रखने की वजह से एक सिख को नौकरी से इंकार करना महंगा पड़ गया, क्योंकि अब उसे इस सिख को धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाने वाली उसकी याचिका के निपटारे के लिए आर्थिक मुआवजा देना होगा। गुरप्रीत खेड़ा ने समान रोजगार अवसर आयोग (इक्वल एम्प्लॉयमेंट ऑपर्चुनिटी कमीशन:ईईओसी) के साथ वर्ष 2009 में ‘‘ट्राई कन्ट्री लेक्सस ’’ के खिलाफ धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने कारों की डीलरशिप वाली कंपनी ‘‘ट्राई कन्ट्री लेक्सस’’ में सेल्स एसोसिएट के पद के लिए आवेदन किया था और वह इस पद के लिए तय मानकों पर खरा भी उतरा। ईईओसी के अनुसार, कार डीलरशिप ने उससे दाढ़ी न रखने का अनुरोध किया लेकिन अपनी धार्मिक आस्था की वजह से उसने ऐसा करने से मना कर दिया। इसके बाद डीलरशिप ने उसे नौकरी देने से इंकार कर दिया।

याचिका के अनुसार, ‘‘ट्राई कन्ट्री लेक्सस’’ के नियमों में कर्मचारियों को दाढ़ी रखने की अनुमति नहीं है और वहां किसी भी तरह की धार्मिक छूट के बिना ड्रेस कोड का कड़ाई से पालन किया जाता है। खेड़ा की ओर से याचिका अधिकार समूह "सिखकोएलिशन" और ‘‘ईईओसी’’ ने दायर की थी। मामले में हुए समझौते के अनुसार, ‘‘ट्राई कन्ट्री लेक्सस’’ खेड़ा को 50,000 डॉलर का भुगतान करेगी। खेड़ा का कहना है कि उन्होंने इस भेदभाव के खिलाफ न सिर्फ अपने लिए, बल्कि सिख समुदाय के लिए भी आवाज उठाई थी।
 


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You