जनरल शरीफ से पाकिस्तान की नई तस्वीर पेश करने की उम्मीद

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Monday, December 02, 2013-1:47 PM

नई दिल्ली: पाकिस्तान में उदारवादी छवि के नए सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ से उम्मीद की जा रही है कि वह अपने पूर्ववर्ती सेना अध्यक्षों की भारतीय सीमा पर संघर्ष और आतंकरिक स्तर पर आतंकवादी संगठनों के पोषण की नीति से कुछ हटकर पहल करके वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की नई तस्वीर पेश करेंगे।

जनरल शरीफ की नियुक्ति को भारतीय सीमा पर शांति बनाए रखने, आंतरिक कलह से निबटने तथा अफगनिस्तान के साथ विदेशी सेना की वापसी के इस दौर मे सबसे चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि नए सेना प्रमुख पुरानी सोच को किनारे रखकर नए सिरे से स्थिति का आकलन करने में विश्वास करते हैं इसलिए वह सभी विपरीत स्थितियों से आसानी से निबट लेंगें।

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के लिए भी सेना प्रमुख पद पर जनरल राहील की नियुक्ति चुनौतीभरी है। शरीफ द्वारा जनरल के पद पर की गई यह चौथी नियुक्ति है और इस बार भी उन्होंने वरिष्ठता की परवाह किए बिना वरिष्ठता में तीसरे क्रम के अधिकारी को सेना प्रमुख बनाया है। ध्यान रहे कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और नव नियुक्त सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ के बीच कोई पारिवारिक रिश्ता नहीं है।

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने उससे पहले तीन सेना प्रमुख नियुक्त किए जिनमें जनरल अब्दुल वहीद ककक्ड ने 1993 में नियुक्ति के बाद जल्द ही शरीफ को धोखा दे दिया और उनके खिलाफ खड़े हो गए। उसके बाद 1999 में उन्होंने सेना में वरिष्ठता की परवाह किए बिना अत्यधिक चतुर जनरल परवेज मुशर्रफ को सेना अध्यक्ष बनाया लेकिन जनरल मुशर्रफ ने ही शरीफ का तख्ता पलट दिया। तख्ता पलट से पहले 1999 में उन्होंने जियाद्दुन बट को सेना प्रमुख नियुक्त किया लेकिन वह कार्यभार ग्रहण नहीं कर सके।

सेना प्रमुख का पाकिस्तान में महत्वपूर्ण पद है। छह लाख सैनिकों वाली दुनिया की छठी सबसे बड़ी सेना का अध्यक्ष पाकिस्तान में कितना ताकतवर है इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि देश के 66 साल के इतिहास में आधा से अधिक समय तक इस्लामाबाद की सत्ता पर सैन्य प्रमुखों का ही राज रहा है। देश की गद्दी संभालते ही सभी सेना प्रमुखों ने सबसे पहले लोकतंत्र को ध्वस्त करने का ही काम किया है।

इस बार लेफ्टिनेंट जनरल राहील शरीफ की नियुक्ति को कुछ लोग यह मानकर चल रहे है कि वह प्रधानमंत्री शरीफ के नजदीकी होंगे और उनके लिए खतरा नहीं बनेंगे। यह सही है कि उन्हें जनरल मुशर्रफ तथा जनरल ककक्ड़ की तरह का महत्वकांक्षी नहीं माना जा रहा है लेकिन यह जानना भी जरुरी है कि नए सेना प्रमुख जनरल शरीफ का प्रधानमंत्री नबाज शरीफ के साथ उपनाम एक होने के अतिरिक्त और कोई संबंध नहीं है।


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