थाईलैंड की प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा ने भंग की संसद

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Tuesday, December 10, 2013-2:59 AM

बैंकाकः थाईलैंड की संकटग्रस्त प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा ने देश में गहराते राजनीतिक संकट के मद्देनजर संसद भंग करने के लिए आज शाही मंजूरी मांगी और ताजा चुनाव कराने का आहवान किया।
    
यिंगलक ने टेलीविजन पर दिए एक बयान में कहा कि सभी पक्षों की बात सुनने के बाद मैंने संसद भंग करने के लिए शाही आदेश का अनुरोध करने का फैसला किया है। 2011 में सत्ता में आने वाली 46 वर्षीय प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली के अनुसार नए चुनाव होंगे। उन्होंने कहा कि लोग यह निर्णय लेंगे कि बहुमत क्या चाहता है और वे देश में किसकी सरकार देखना चाहते हैं।
    
थाईलैंड के चुनाव संबंध कानून के अनुसार आगामी 60 दिन में चुनाव होने आवश्यक हैं। यिंगलक ने कहा कि मैं प्रत्येक राजनीतिक दल से कहना चाहती हूं कि वे थाईलैंड के लोगों की खातिर लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत समाधान तलाशने के लिए चुनाव का इस्तेमाल करें। उन्होंने ऐसे समय पर यह घोषणा की है जब हजारों प्रदर्शनकारी उनकी सरकार के खिलाफ आखिरी बिगुल फूंके जाने के तहत बैंकाक की गलियों में एकत्र हुए। विपक्षी सांसदों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के लिए कल सामुहिक तौर पर इस्तीफा दे दिया।
    
यिंगलक ने कहा कि वह अंतरिम सरकार की प्रमुख बनी रहेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि स्थिति हिंसक हो सकती है इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि लोग चुनाव के जरिए स्वयं फैसला कर सकें। यिंगलक ने कहा कि उनकी सरकार ने संकट का हल खोजने का हर संभव प्रयत्न किया और प्रदर्शनकारियों से बात की। इससे पहले पूर्व उप प्रधानमंत्री और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के नेता सुतेप ताउगसुबन ने कहा था कि प्रदर्शनकारी यिंगलक को अपदस्थ करने के लिए आज आखिरी बिगुल फूंकेंगे।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री अपने भाई और पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा के हाथों की कठपुतली हैं। सेतुप ने कहा कि देश में थाकसिन प्रभाव के जड़ से समाप्त हो जाने तक जन रैलियां आयोजित होती रहेंगी। प्रदर्शनकारियों के एक अन्य नेता सतित वांगनोंगताई ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि संसद भंग होना उनकी पहली जीत है लेकिन यह वास्तविक लोकतंत्र हासिल करने के लिए काफी नहीं है और प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि पीपल्स डेमोकेट्रिक रिफोर्म कमेटी चाहती है कि लोगों की परिषद का गठन हो और कार्यवाहक सरकार इस्तीफा दे। (एजेंसी)


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