जब मंडेला और गांधी से मिले छोटू भाई माकन

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Tuesday, December 10, 2013-5:54 PM

जोहान्सबर्ग: 90 वर्षीय छोटू भाई माकन दक्षिण अफ्रीका में जीवित बचे शायद आखिरी ऐसे व्यक्ति हैं, जो वर्ष 1930 में महात्मा गांधी के प्रसिद्ध दांडी मार्च और एक गैर रंगभेदी राष्ट्र की मांग को लेकर वर्ष 1955 में नेल्सन मंडेला की मौजूदगी में स्वतंत्रता के ऐतिहासिक घोषणा पत्र पर हुए हस्ताक्षर के गवाह रहे हैं। स्वतंत्रता के इस ऐतिहासिक घोषणा पत्र की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर जोहान्सबर्ग के उपनगरीय इलाके क्लिपटाउन में मंडेला से दोबारा हुई उनकी मुलाकात उनके जीवन का एक विशेष क्षण था।

माकन मंडेला को उनके कबिलाई नाम से बुलाते हुए बताते हैं, ‘‘गुआतेंग के प्रधानमंत्री ने इस मौके पर अन्य धार्मिक प्रार्थनाओं के साथ हिंदू प्रार्थना के लिए मुझे आमंत्रित किया था। इस प्रार्थना के तुरंत बाद मैंने कार्यक्रम निदेशक के जरिए सुरक्षा अधिकारी से मदीबा से मिलने की इजाजत मांगी, जो मंच के मुख्य टेबल से दूर बैठे हुए थे।’’

उस दिन को याद करते हुए माकन बताते हैं, ‘‘मैंने उनसे हाथ मिलाया और खुद को जसमत नाना का करीबी सहयोगी के तौर पर पेश किया, जिसे मदीबा जेस्सी नाम से जानते थे और रंगभेद विरोधी आंदोलन में भूमिका के उन्हें राष्ट्रीय समान से नवाजा गया था। यह सुन कर मदीबा काफी खुश हुए और मुझे बधाई दी। मैं काफी सौभाग्यशाली हूं कि मुझे पिछली सदी के दो महानतम नेताओं गांधीजी और मदीबा के साथ मिलने का मौका मिला।’’

गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका को रंगभेद के बंधनों से आजाद कर बहु-जातीय लोकतंत्र की राह पर पहुंचाने वाले देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति मंडेला का लंबी बीमारी के बाद गुरवार देर रात निधन हो गया था।


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