भारत को ढोना पड़ सकता है अमेरिकी इलेक्ट्रानिक कूड़ा

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Sunday, December 15, 2013-11:20 PM

लंदनः संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भारत को अमेरिका के इलेक्ट्रानिक कूड़े का बोझ भी ढोना पड़ेगा। वर्तमान में अमेरिका दुनिया भर में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रानिक कूड़ा पैदा करने वाला देश है।

संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर के देशों तथा गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों की संस्था साल्विंग द ई-वेस्ट प्राब्लम द्वारा कल प्रकाशित रिपोर्ट में पहली बार इलेक्ट्रानिक कूड़े की समस्या का अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2012 में 94 लाख टन इलेक्ट्रानिक कूड़ा पैदा करके अमेरिका पहले तथा 73 लाख टन कूड़े के साथ चीन दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2017 तक चीन में इलेक्ट्रानिक कूड़े का उत्पादन 33 प्रतिशत बढऩे की आशंका जताई गई है।

इसका मतलब चीन अमेरिका से भी आगे निकल जाएगा। इस मामले में भारत 27.51 लाख टन के साथ इन देशों से काफी पीछे है, लेकिन आशंका है कि भविष्य में बड़ी मात्रा में अमेरिका का इलेक्ट्रानिक कूड़ा निस्तारण के लिए भारत भेजा जा सकता है क्योंकि चीन और मलेशिया इस साल के अंत में अपनी ग्लास-टू-ग्लास भट्ठी बंद कर देंगे। इसके बाद भारत अकेला ऐसा देश होगा जहां यह सुविधा होगी।


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