भारत-अमेरिका के बीच कूटनीतिक तकरार बढ़ी

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Wednesday, December 18, 2013-1:59 AM

वाशिंगटनः न्यूयार्क में भारतीय राजनयिक देवयानी खोब्रागाडे को गिरफ्तार करने के बाद उनकी गहन तलाशी ली गई थी। इस घटना की खबर मीडिया में आने पर भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तकरार की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि उसने सिर्फ स्थापित मानकों के तहत कार्रवाई की है। भारत की तरफ से इस खबर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इसके लिए न्याय विभाग और स्थानीय पुलिस की जवाबदेही की बात करते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मेरी हर्फ से जब सोमवार को पूछा गया कि भारतीय राजनयिक के साथ वैसी शालीनता क्यों नहीं बरती गई, जो अमेरिका अपने राजनयिकों के साथ चाहता है तो उन्होंने कहा, ‘‘विदेश मंत्रालय के कूटनीतिक सुरक्षा विभाग ने गिरफ्तारी के दौरान स्थापित मानकों के अनुसार कार्रवाई की है। उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें अमेरिका के मार्शल के सुपर्द कर दिया गया। उनके साथ किए गए व्यवहार पर अमेरिकी मार्शल से सवाल करना चाहिए न कि हमसे।’’

मीडिया खबरों के मुताबिक, खोब्रागाडे को वीजा धोखाधड़ी और घरेलू नौकरानी व आया का शोषण करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था, उन्हें न सिर्फ हथकड़ी लगाई गई थी बल्कि हिरासत में गहन तलाशी ली गई थी और आम अपराधियों, मादक पदार्थों का सेवन करने वालों और यौन कर्मियों के साथ रखा गया था।

खोब्रागाडे को उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब वह अपनी बेटी को स्कूल छोडऩे गई थीं। उन्हें हालांकि, 2,50,000 डॉलर की जमानत राशि पर छोड़ दिया गया था। उन्हें जनवरी महीने में अदालत में पेश होना है। भारतीय लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने नाराजगी जताते हुए अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इंकार कर दिया है। इस पर हर्फ इस मामले में अपना पल्ला झाड़ते नजर आईं।

हर्फ ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि इस पर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल बयान देगा। मैं कार्रवाई देख कर खुश हूं। मैं इसके बारे में विस्तार से नहीं जानती।’’ उन्होंने कूटनीतिक अधिकार और वाणिज्यदूत के अधिकार के बीच अंतर भी जाहिर किया। उन्होंने कहा, ‘‘वियना संधिपत्र के मुताबिक वाणिज्यदूत के संबंध में भारत के उप महावाणिज्यदूत को अमेरिकी अदालत की तरफ से सिर्फ वाणिज्यदूत के कार्य से संबंधित अधिकार प्राप्त है। यह न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरे विश्व में है।’’

अमेरिकी राजदूत नैंसी पॉवेल से भारतीय विदेश सचिव सुजाता सिंह ने मामले पर जवाब मांगा है, और इस पर अमेरिकी प्रतिक्रिया के संबंध में हर्फ ने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। हर्फ ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद अमेरिका के उप विदेश मंत्री, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से बात की है।


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