अफगान से पश्चिमी सेनाओं की वापसी से जेल में बंद महिलाओं का खौफ बढ़ा

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Friday, December 20, 2013-1:22 AM

हेरातः अफगानिस्तान से अमेरिका के नेतृत्व वाली पश्चिमी देशों की सेना की वापसी की सीमा जैसे-जैसे निकट आ रही है, यहां जेलों में बंद महिलाओं की चिंताएं बढती जा रही है। यहां काम करने वाले एक मानवाधिकार संगठन के शोधकर्ता हीथर बार द्वारा अलग-अलग अपराधों के लिए जेल में बंद महिलाओं से इस संबंध में ली गई जानकारी में महिलाओं ने अपने इस डर का खुलासा किया।

अधिकतर महिलाओं का मानना है कि सरकार उनके अधिकारों को लेकर बिल्कुल संवेदनशील नहीं है। पश्चिमी देशों की सेनाओं के साथ यहां मानवीय तथा आर्थिक मदद प्रदान करने वाले संगठन भी काम कर रहे हैं। इन संगठनों और दानकर्ताओं की मदद से जेलों में बंद महिलाओं को भोजन और स्वास्थ्य के साथ कम्प्यूटर आदि की तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था अभी तक सुचारू रूप से की जाती रही है लेकिन जेलों में बंद महिलाओं को यह चिंता सताने लगी है कि सेनाओं की वापसी के बाद उनका क्या होगा।

महिलाओं को डर है कि अमेरिकी सेनाओं की वापसी के साथ यहां आने वाले आर्थिक मदद भी रोकी जा सकती है। शोधकर्ता हीथर ने जेल में बंद एक ऐसी ही महिला फरीदा से बात की। फरीदा ने कई साल पहले अपने पति की हत्या कर दी थी। उसके पति ने अपने नशे की जरूरत पूरा करने के लिए  तीन साल की बेटी को बेच दिया था। इस पर फरीदा ने चाकू घोंपकर पति की हत्या कर दी थी। पति के शव को गली में डालकर उसने खुद पुलिस को इसकी सूचना दी थी। इसके लिए फरीदा को 20 साल की सजा दे दी गई थी।


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