युगांडा के समलैंगिकता विरोधी कानून पर अमेरिका ने जताई ‘चिंता’

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Wednesday, December 25, 2013-11:14 AM

वाशिंगटन: युगांडा की संसद द्वारा पारित समलैंगिकता विरोधी कठोर कानून पर अमेरिका ने चिंता जताई है। अमेरिका के विदेश विभाग की प्रवक्ता जेन प्साकी ने कहा, ‘‘युगांडा की संसद द्वारा पारित समलैंगिकता विरोधी कानून पर हम गहरी चिंता जताते हैं।’’

उन्होंने कहा कि एक अमेरिकी नागरिक होने के नाते हमारा मानना है कि हर जगह के लोगों को स्वतंत्रता और समानता से जीवन जीने का अधिकार है। चाहे वह जिनसे भी प्यार करें, उनके साथ किसी तरह की हिंसा या भेदभाव नहीं बरती जाए।

युगांडा कानून के तहत समलैंगिकता अपराध है और इसके तहत उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है। पिछले सप्ताह युगांडा की संसद ने विधेयक से केवल मृत्युदंड के खंड को हटाकर इसे बिना किसी रूकावट के पारित कर दिया।

कार्यकर्ताओं को अंदेशा है कि युगांडा के एवेंलेजिकल ईसाई राष्ट्रपति योवरी मुसेवेनी इस कानून पर अपनी सहमति दे देंगे।  युगांडा में पुरूष समलैंगिकों को बराबर यौन उत्पीडऩ, धमकी, यातना और हिंसा का सामना करना पड़ता है और कार्यकर्ताओं का कहना है कि सजा के बतौर प्राय: महिला समलैंगिकों का ‘सुधारात्मक’ बलात्कार किया जाता है।

इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भी युगांडा की संसद में समलैंगिकता विरोधी कानून पारित होने की निंदा कर चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित डेसमंड टुटु ने इसकी तुलना रंगभेद से की थी।युगांडा लंबे समय से अमेरिका का सहयोगी देश रहा है, अमेरिका के साथ उसके सैन्य संबंध रहे हैं।


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