अमेरिका पर मुकदमा ठोक सकती हैं देवयानी बशर्ते...

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Friday, December 27, 2013-3:41 PM

वाशिंगटन: अमेरिका ने आज कहा कि वह भारत द्वारा यह सूचित किए जाने के बाद देवयानी खोबरागड़े को संयुक्त राष्ट्र की मान्यता के मुद्दे को देख रहा है कि भारतीय राजनयिक को वीजा फर्जीवाड़े के आरोप में उनकी गिरफ्तारी से पहले ही विश्व निकाय से संबद्ध कर दिया गया था।

अमेरिकी विदेश विभाग की उप प्रवक्ता मैरी हर्फ ने कहा, ‘‘हमें भारत सरकार ने बताया है कि डॉ. खोबरागड़े को सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र में अधिसूचित किया गया था।’’ सूत्रों ने कहा कि देवयानी को सितंबर के शुरू में संयुक्त राष्ट्र की टीम का हिस्सा बनाए जाने के भारत के दावे से भारतीय राजनयिक को पूर्ण राजनयिक छूट मिल जाएगी और उनकी गिरफ्तारी को विएना संधि का उल्लंघन माना जाएगा।

नवीनतम खुलासे से यह सामने आया है कि देवयानी को पूर्ण राजनयिक अधिकार प्राप्त थे और इसके तहत उन्हें गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने से भी छूट प्राप्त थी। न्यूयॉर्क में भारतीय उप महावाणिज्य दूत के रूप में तैनात 39 वर्षीय देवयानी को संयुक्त राष्ट्र द्वारा 26 अगस्त 2013 से ‘‘संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन में सलाहकार के रूप में’’ भी मान्यता प्राप्त थी तथा सलाहकार के रूप में उनका दर्जा 31 दिसंबर 2013 तक वैध था।

गौरतलब है कि वर्ष 1999 बैच की आईएफएस अधिकारी देवयानी खोबरागड़े को अपनी घरेलू सहायिका संगीता रिचर्ड के वीजा आवेदन में झूठी घोषणाएं करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें बाद में 250,000 डॉलर के मुचलके पर रिहा किया गया था। खबरों में कहा गया था कि गिरफ्तारी के बाद कपड़े उतरवाकर देवयानी की तलाशी ली गई थी और उन्हें अपराधियों के साथ जेल में रखा गया था। इससे दोनों देशों के बीच विवाद खड़ा हो गया था।

जवाबी कार्रवाई में भारत ने अमेरिकी राजनयिकों को दिए गए खास श्रेणी के विशेषाधिकारों को कम कर दिया था तथा अन्य कदम भी उठाए थे।  इस बीच, भारतीय-अमेरिकी अधिवक्ता रवि बत्रा ने कहा कि देवयानी इस बात के लिएअमेरिका पर मुकदमा ठोक सकती हैं कि उन्हें संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की सदस्य के रूप में राजनयिक छूट प्राप्त होने के बावजूद वाशिंगटन ने विएना संधि का उल्लंघन कर गिरफ्तार किया गया।

बत्रा ने कहा, ‘‘यदि देवयानी वास्तव में भारत के स्थाई मिशन में संयुक्त राष्ट्र से मान्यताप्राप्त ‘सलाहकार’ थीं, तो उन्हें गिरफ्तारी से पूर्ण राजनयिक छूट प्राप्त थी तथा वह असंवैधानिक और गलत गिरफ्तारी के लिए अमेरिका के खिलाफ मामला दायर कर सकती हैं।’’
 


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