ग्रुप में शामिल होने के लिए मिलती थी थर्ड डिग्री की यातनाएं, पहनने पड़ते थे डायपर

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Friday, January 03, 2014-11:11 AM

न्‍यूयॉर्क: आपने कॉलेज में होने वाली रैगिंग के बारे में तो बहुत बार सुना होगा, लेकिन क्‍या आपने कभी यह सुना है कि यूनिवर्सिटी के किसी ग्रुप में शामिल होने के लिए कितनी यातनाओं से होकर गुजरना पड़ता है। अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी की कुख्‍यात फ्रटर्निटी के एक पूर्व सदस्‍य ने इस बात का खुलासा किया है कि किस तरह फ्रटर्निटी का सदस्‍य बनने के लिए उन्हें मारा-पीटा गया और बर्फ से भरी बाल्‍टी में नंगे बदन खड़ा रखा गया।

अमेरिका की अलाबामा यूनिवर्सिटी में 9 मार्च 1956 में 'सिग्‍मा एल्‍फा इप्‍सीलॉन फ्रटर्निटी' का गठन हुआ था। यह फ्रटर्निटी शराब, ड्रग्‍स, और कड़े टास्‍क से होने वाली मौतों के लिए जानी जाती है। उस वक्‍त जस्टिन स्‍टुअर्ट 19 साल के थे और अमेरिका के मैरीलैंड की सेलिसबरी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। तब स्‍टुअर्ट 'सिग्‍मा एल्‍फा इप्‍सीलॉन' नाम की फ्रटर्निटी की ब्रांच के नए-नए सदस्‍य बने थे। स्‍टुअर्ट को फ्रटर्निटी में शामिल होने के लिए ग्रुप की खतरनाक रस्‍मों को निभाने के लिए कड़ी यातनाओं से होकर गुजरना पड़ा।

स्‍टुअर्ट ने बताया कि किस तरह उन्‍हें बर्फ से भरी बाल्‍टी में नंगे बदन रहकर सिद्धांतों को पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता था। इस दौरान उन्‍हें सिर्फ अंडरवियर पहनना होता था और बाकी सदस्‍य उन पर पानी की बाल्टियां डालते थे। उन्‍होंने यह भी बताया कि साल 2012 में उन्‍हें आठ हफ्तों तक डंडों से पीटा गया। इतना ही नहीं उन्हें उतनी देर तक पानी पीने के लिए कहा जाता था, जब तक वह बेहोश नहीं हो जाते थे। साथ ही उन्हें महिलाओं के कपड़े और नैपीज पहनने के लिए मजबूर किया जाता था। एक सदस्य को तो नौ घंटे के लिए बिना खाना और टॉयलेट  की इजाजत दिए बेसमेंट में बंद कर दिया।

विदेशी अखबार 'द इंडीपेंडेंट' के अनुसार, स्‍टुअर्ट अब किसी और यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं वह कहते हैं कि बीता कल उन्हें आज भी परेशान करता है। स्‍टुअर्टने बताया,  ''मुझे अभी भी बेसमेंट में हुए अत्‍याचारों के सपने आते हैं। मुझे चीखने-चिल्‍लाने की आवाजें सुनाई देती हैं। ऐसा लगता है कि मानो वह अभी मुझ पर हमला कर देंगे। फिर मेरी आंख खुल जाती है और मैं अपने बुरे सपने से बाहर आ जाता हूं।"

स्‍टुअर्ट ने इस अत्‍याचार की शिकायत यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को की, जिसके बाद इस फ्रटर्निटी को इस साल फरवरी तक बैन कर दिया गया। इस बैन से फ्रटर्निटी के कुछ सदस्‍य तो इतने नाराज हो गए कि उन्‍होंने यूनिवर्सिटी को डोनेशन देना बंद कर दिया।

आपको बता दें कि 2012 की इस रिपोर्ट को अब जाकर सार्वजनिक किया गया है। अमेरिका के लगभग हर एक राज्‍य में इस फ्रटर्निटी की शाखाएं हैं। और अब तक इसके खिलाफ 100 से भी ज्‍यादा बार अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की जा चुकी है। 2009 से लेकर अब तक इसकी 15 शाखाएं बंद कर दी गईं हैं।
 


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