राजद्रोह मामलाः मुशर्रफ को 16 जनवरी को अदालत ने उपस्थित होने का आदेश

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Thursday, January 09, 2014-5:48 PM

इस्लामाबाद: मेडिकल रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद परवेज मुशर्रफ के खिलाफ राजद्रोह के आरोप में मुकदमा चला रही विशेष अदालत ने उन्हें 16 जनवरी को अपने समक्ष उपस्थित होने को आज कहा और संकेत दिया कि अगर मुशर्रफ उसके समक्ष उपस्थित नहीं हुए तो वह मुश्किलों में घिरे पूर्व तानाशाह के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

विशेष अदालत के तीन न्यायाधीशों ने उनकी मेडिकल रिपोर्ट की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने के बाद यह आदेश दिया। विशेष अदालत का गठन साल 2007 में आपातकाल लगाने के लिए 70 वर्षीय मुशर्रफ के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए किया गया था। मुशर्रफ को 16 जनवरी को अदालत के समक्ष उपस्थित होने का आदेश देते हुए अदालत ने कहा कि अगर मुशर्रफ उस दिन उपस्थित होने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ ‘उचित आदेश’ जारी किया जाएगा।

मुशर्रफ को गत दो जनवरी को रावलपिंडी में एक सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अदालत ले जाए जाने के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। मुशर्रफ के घर के निकट विस्फोटक मिलने के बाद वह पिछली दो सुनवाइयों में अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हो सके थे। विशेष अदालत ने कहा कि मुशर्रफ के वकील से सुनवाई में व्यक्तिगत पेशी से छूट का कोई लिखित अनुरोध नहीं मिला है। न्यायाधीशों ने इससे पहले मुशर्रफ के स्वास्थ्य पर अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

आज की सुनवाई के दौरान अभियोजक अकरम शेख ने कहा कि मुशर्रफ की मेडिकल रिपोर्ट में ऐसी किसी भी स्थिति का उल्लेख नहीं किया गया है जो राजद्रोह के मुकदमे में उनके सुनवाई में हिस्सा नहीं लेने को उचित ठहराता हो। उन्होंने कहा कि अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद से पूर्व सेना प्रमुख की एंजियोग्राफी भी नहीं हुई है और यह साबित करता है कि उनकी हालत गंभीर नहीं है।

शेख ने दावा किया कि मुशर्रफ का रक्तचाप किसी खिलाड़ी के समान है जबकि उनके हृदय की हालत 18 वर्षीय व्यक्ति के समान है। मुशर्रफ के वकील अहमद रजा कसूरी ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति को स्वस्थ होने और आराम करने के लिए और समय चाहिए। उन्होंने कहा कि मुशर्रफ के स्वास्थ्य की स्थिति ‘गंभीर’ है। उन्होंने विशेष अदालत के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘‘अस्पताल निश्चित तौर पर अपने मरीजों को निष्कासित नहीं कर देगा। यह मुशर्रफ का विशेषाधिकार है कि वह अस्पताल से निकलें या नहीं।’’

पाकिस्तान में अनेक अच्छे चिकित्सा केंद्र हैं और मुशर्रफ को इलाज के लिए विदेश भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है। मुशर्रफ के फिलहाल विदेश जाने पर रोक है और ऐसी अटकलें जोरों पर हैं कि अधिकारी उनके स्वास्थ्य की स्थिति का इस्तेमाल इलाज के लिए उन्हें पाकिस्तान छोडऩे की अनुमति दिए जाने की मांग करने के लिए कर सकते हैं। मुशर्रफ पाकिस्तान के इतिहास में पहले जनरल हैं जो राजद्रोह के आरोप में मुकदमे का सामना कर रहे हैं और अगर वह दोषी ठहराए जाते हैं तो उन्हें आजीवन कारावास या मौत की सजा दी जा सकती है।


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