अभी भारत के साथ रिश्तों के लिए चुनौतीपूर्ण समय: अमेरिका

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Saturday, January 11, 2014-5:20 PM

वाशिंगटन: भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े को स्वदेश वापस भेजे जाने के बाद भारत की त्वरित और कटु जवाबी कार्रवाई ने अमेरिका को हतप्रभ कर दिया है और उसने इस मुद्दे पर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका ने भारत के सख्त रूख को देखते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए चुनौतीपूर्ण समय बताया है, लेकिन साथ ही भविष्य के प्रति आशा भी जताई है।

भारत ने देवयानी की स्वदेश वापसी के आदेश के तत्काल बाद नई दिल्ली स्थित अमेरिकी मिशन में तैनात एक समक्ष राजनयिक को भारत छोडऩे को कह दिया। अमेरिकी राजनयिक के नाम की जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन उच्च स्तीय सूत्रों के मुताबिक उन्होंने अमेरिका की उड़ान भर ली है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन प्साकी ने भारत के इस अप्रत्याशित कदम पर टिप्पणी करते हुए कहा हमें इस बात का गहरा दुख है कि भारतीय सरकार को हमारे राजनयिक को वापस भेजना जरूरी लगा। यह अमेरिका और भारत के रिश्ते के लिये निश्चय ही चुनौतीपूर्ण समय है। हमें यह उम्मीद और आशा है कि यह मामला अब खत्म हो जायेगा और हमार ेसाथ अपने रिश्ते सुधारने के लिये भारत सरकार जरूरी कदम उठाएगी।..

सूत्रों के मुताबिक,  खोबरागड़े के खिलाफ दोषारोपण करने से पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार को उनकी स्वदेश वापसी का इंतजाम करने के लिए कह दिया था। खोबरागड़े कल देर रात भारत पहुंची और अपनी वापसी के लिए देशवासियों का शुक्रिया अदा किया।  आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी राजनयिक को देश से बाहर जाने को कहा गया है। वह खोबरगड़े के समक्ष हैं और उन्होंने इस पूरे विवाद की जड़ घरेलूकर्मी संगीता रिचर्ड के परिवार को अमेरिका जाने में मदद की थी।

वाशिंगटन पोस्ट ने इस राजनयिक का नाम वेन में बताया है। वेन में नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के सुरक्षा प्रमुख थे। वह 2010 से वहां तैनात थे। भारत ने अपने इस कदम से दोनों देशों के संबंधों पर विपरीत असर पडऩे से इन्कार किया है। इस बारे में एक सवाल पर सूत्रों ने कहा कि हमारे द्विपक्षीय संबंध सिर्फ एक मुद्दे पर केन्द्रित नहीं है। इससे पहले 1981 में भारत और अमेरिका की तरफ से राजनयिको को वापस भेजने की कार्रवाई हुई थी। अमेरिका ने भारतीय राजनयिक प्रभाकर मेनन और भारत ने अमेरिकी राजनयिक जार्ज सी. बी ग्रिफिन्स को वापस भेजा था।


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