सिकंदर की मौत के राज से उठा पर्दा

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Sunday, January 12, 2014-7:40 PM
वेलिंगटन: युद्धभूमि में अपार उपलब्धियों के बीच एलेक्जेंडर ग्रेट ‘सिकंदर’ की मात्र 32 साल की उम्र में हुई आकस्मिक मौत के पीछे की कई कहानियां इतिहास में दर्ज हैं। विभिन्न इतिहासकारों और कथाकारों ने सिकंदर की मौत को अपनी कल्पना और सृजन का चोंगा ओढा दिया और सच्चाई इन मनगढंत कहानियों के पर्दे में दो हजार साल से अधिक समय तक छुपी रही।
 
‘न्यूजीलैंड हेराल्ड’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक सिकंदर की मौत के पीछे के राज के बारे में ओटामा विश्वविद्यालय के एक वैज्ञानिक लियो शेप और उनके सहयोगी प्रोफेसर डाक्टर पैट वीटली का शोध मेडिकल पत्रिका टोक्सिकोलाजी में प्रकाशित हुआ है। इस शोध के मुताबिक 323 ईसा पूर्व में सिकंदर की मौत के पीछे एक पौधे ‘हेलबोर’ का हाथ है।
 
सफेद रंग के हेलबोर को वेराट्रम एल्बम कहा जाता है। इतिहास में दर्ज हर कहानी में सिंकदर को उसकी मौत से पहले 12 दिन तक तड़पते दिखाया गया है। सिंकदर इस दौरान न बात कर सकता था, न ही चल सकता था।
 
टोक्सिकोलाजी के प्रोफेसर डाक्टर शेप के मुताबिक उन्होंने एक दशक से अधिक समय सिकंदर के मौत के पीछे की वजह को जानने में लगा दिया। इस दौरान किए गए तमाम अध्ययनों में यह पता चला कि सिकंदर की मौत के पीछे एक पौधे हेलबोर का हाथ है। सिकंदर को उसके साथियों या किसी अन्य व्यक्ति ने हेलबोर से बनी शराब पिलाई थी। हालांकि उनके मुताबिक सिकंदर को यह जहर जानबूझकर दिया गया या गलती से इसका पता नहीं चल पाया है।

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