'ऑपरेशन ब्लू स्टार' में कैमरन ने दिए जांच के आदेश

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Tuesday, January 14, 2014-2:49 PM

लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने 1984 में भारत में अमृतसर के प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर से उग्रवादियों को खदेडंने की योजना 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' में मार्गेट थैचर की सरकार द्वारा तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मदद किए जाने के दावे की जांच का आदेश दिया गया है।

ब्रिटेन में लेबर पार्टी के सांसद टॉम वाटसन और हाउस ऑफ लार्ड्स के सिख सदस्य इंदरजीत सिंह ने इस साल सार्वजनिक किए गए गोपनीय दस्तावेजों  में आपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन की ओर मदद पहुंचाने के दावे की जांच की मांग की थी। दस्तावेजों के मुताबिक, मार्गेट थैचर की सरकार ने ब्रिटेन के स्पेशल एयर सर्विस के अधिकारियों को इस ऑपरेशन में मदद पहुंचाने के लिए भारत भेजा था। इस ऑपरेशन के दौरान 1000 लोग मारे गए थे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने देर रात जारी विज्ञप्ति में बताया कि कैमरन ने कल रात कैबिनेट सचिव को इस मामले की जांच करके सच्चाई सामने लाने का आदेश दिया है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा, "इस ऑपरेशन में कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था और सरकार इन दस्तावेजों के प्रकाशित होने से उठे मुद्दों की गंभीरता समझती है। प्रधानमंत्री ने इसी वजह से कैबिनेट सचिव को तत्काल इसकी जांच करने का आदेश दिया है।" 

ब्रिटेन के नियमों के मुताबिक, गोपनीय दस्तावेजों को 30 साल के बाद सार्वजनिक किया जाता है। इस महीने सार्वजनिक किए दस्तावेजों में एक पत्र भी शामिल है, जिस पर 23 फरवरी 1984 की तारीख और सिख कम्युनिटी अर्थात सिख समुदाय शीर्षक अंकित है। यह पत्र ऑपरेशन ब्लू स्टार के क्रियान्वन के चार महीने पहले लिखा गया है।

पत्र में लिखा है,  "भारतीय सरकार ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से उग्रवादियों को निकाल भगाने की योजना में ब्रिटेन की सलाह मांगी
है।" उस समय तत्कालीन विदेश सचिव ने भारत सरकार के आग्रह को माना और तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गेट थैचर की सहमति से ब्रिटिश वायुसेना के एक अधिकारी को गांधी से मिलने भारत भेजा। इस अधिकारी ने ही ऑपरेशन की सारी योजनाएं बनाईं, जिसे  गांधी ने मंजूर किया। ब्रिटिश सरकार को तब ही पता चला था कि गांधी जल्द ही ऑपरेशन ब्लू स्टार को अमल में लाएगीं।

वाटसन ने कहा, "मैंने सोमवार सुबह को ही यह दस्तावेज देखे हैं और मुझे जानकारी मिली है कि अभी ऐसे कई दस्तावेज गोपनीय है। यह समझा जा सकता है कि मानवाधिकारों और ब्रिटिश सिखों की सुरक्षा को लेकर चिंतित सभी लोग जानना चाहेंगे कि इस अवधि में और इस घटनाक्रम में ब्रिटेन की सहभागिता किस स्तर तक थी। हम विदेश मंत्री से इस विषय पर उनका जवाब चाहते हैं।"

लार्ड सिंह ने कहा, "गांधी की सरकार इस ऑपरेशन के कुछ सप्ताह पहले तक इस बात का दावा करती रही थी कि उन्होंने स्वर्ण मंदिर पर कार्रवाई करने की कोई योजना नहीं बनाई, लेकिन इन गोपनीय दस्तावेजों के जारी होने से उस दावे की पोल खुल गई है। इस दस्तावेज से पता चलता है सिख हमेशा से कटघरे में खड़े थे और स्वर्ण मंदिर पर की जाने वाली कार्रवाई की योजना महीनों पहले बन गई थी। मैंने इस मामले की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए भारतीय उच्चायोग के जरिए भारत सरकार से संपर्क किया है । यह मामला अब हाउस ऑफ लार्ड्स में भी उठाऊंगा।"


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