उत्पादन के साथ खाने की पौष्टिकता बढ़ाने से मिटेगी भुखमरी: FAO

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Saturday, January 18, 2014-5:31 PM

बर्लिन: जिस तेजी से दुनिया की आबादी बढ़ रही है, भुखमरी और कुपोषण से लडऩे के लिए सिर्फ खाद्य उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन उत्पादों का पौष्टिक होना भी अपरिहार्य होगा।

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में खाद्य एवं कृषि ग्लोबल फोरम 2014 के दौरान संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की महानिदेशक हेलेना सेमेदो ने कहा, "1945 से वैश्विक खाद्य उत्पादन तीन गुना हो चुका है। औसत खाद्य उपलब्धता भी 40 प्रतिशत बढ़ चुकी है। लेकिन जिस तरह से दुनिया की खाद्य प्रक्रिया काम करती है, उसमें अभी भी काफी खामियां हैं।"

समेदो ने कहा कि भोजन की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद आज भी दुनिया में 84 करोड़ लोग हर रोज खाली पेट सोते हैं। इससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिसका असर उनके परिवार पर पड़ता है और बीमारी तथा समयपूर्व मौत की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा दुनिया की सात अरब की आबादी में से आधे लोग या तो जरूरत से ज्यादा खाना खाते हैं या जरूरत से कम। डेढ़ अरब लोग मोटापे के शिकार हैं। इससे वे मधुमेह, दिल की बीमारी तथा जीवन शैली संबंधी अन्य बीमारियों से पीड़ित हो जाते हैं।

सेमेदो ने बताया कि वर्ष 2050 तक दुनिया की आबादी 9 अरब 60 करोड़ पहुंच जाएगी। सौभाग्यवश हम अपने उत्पादन और उपभोग के तरीके में बदलाव कर उन्हें पर्याप्त पौष्टिक भोजन मुहैया करा सकते हैं। उन्होंने कहा, "हमें मौजूदा आबादी के लिए पौष्टिक खाद्यान्न भी उपलब्ध कराना है और भावी पीढ़ी के लिए भी उत्पादन की क्षमता बचाए रखनी है ताकि वे अपना पेट भर सकें।"

उन्होंने कहा, "उत्पादन के हर चरण में खेत से थाली तक हर संसाधन का समुचित उपयोग करना होगा। पानी की हर बूंद, जमीन के हर टुकड़े, खाद के हर औंस और मजदूरों के पसीने की हर बूंद का इस्तेमाल अधिक से अधिक उत्पादन के लिए करना होगा। खाद्य प्रक्रिया से जुड़े हर सैक्टर और व्यक्ति को खाने की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए।"


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