भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय व्यापार बढाने पर सहमत

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Saturday, January 18, 2014-6:01 PM

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी व्यापार बढ़ाने के उपायों के तहत दोनों पक्षों ने एक भेदभाव मुक्त बाजार प्रवेश (एनडीएमए)  कार्यक्रम अपनाने का आज निर्णय किया। दोनों पड़ोसी देशों में वाघा-अटारी सीमा को व्यापार के लिए बारहो माह चौबीसो घंटे खोले रखने तथा दोनों देशों के बैंकों को एक-दूसरे देश में शाखाएं खोलने की अनुमति पर भी सहमति बनी है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्री खुर्रम दस्तगीर खान के साथ यहां एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमारे बीच सहमति बनी है कि हम व्यापार के लिए वाघा-अटारी सीमा सातो दिन चौबीसो घंटे खुला रखेंगे।’’ दोनों देशों के केंद्रीय बैंक संबद्ध सरकारों द्वारा नामित बैंकों को बैंकिंग लाइसेंस देने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हुए हैं। सोलह महीने के अंतराल के बाद हुई बैठक में दोनों देशों के वाणिज्य मंत्री पारस्परिक आधार पर एनडीएमए पर सहमत हुए हैं। यद्यपि भारत पाकिस्तान से सबसे तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) दर्जा दिए जाने की मांग करता रहा है, शर्मा ने एनडीएमए के बारे में कहा, ‘‘यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के शब्द (एनडीएमए) का इस्तेमाल किया गया है।’’ दोनों मंत्रियों ने व्यापारियों को एक-दूसरे के देश की यात्रा की सुविधा के लिए वीजा प्रणाली उदार किए जाने की जरूरत पर भी बल दिया।

शर्मा ने कहा, ‘‘ एक जबरदस्त आर्थिक संबंध विकसित करने के लिए दोनों पक्षों के व्यापारियों को आवाजाही की सुविधा देने की जरूरत है। वीजा प्रणाली को और उदार किए जाने की जरूरत है।’’ शाखाएं खोलने के संबंध में खान ने कहा कि पाकिस्तान भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उन बैंकों को नामित किए जाने की प्रतीक्षा करता रहा है जिन्हें पाकिस्तान में शाखाएं खोलने की अनुमति दी जा सके। वर्ष 2012-13 में भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2.60 अरब डालर के बराबर था।


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