वार्ता में शामिल होने के लिए कोई शर्त स्वीकार नहीं करेगी ईरान

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Monday, January 20, 2014-8:43 PM

पेरिस: सीरिया मसले पर जेनेवा वार्ता में विषय सूची को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं। अमेरिका ने कहा है कि अगर ईरान सार्वजनिक रूप से 2012 के समझौते को समर्थन नहीं देता है तो उससे 22 जनवरी को जेनेवा में होने वाली वार्ता में भाग लेने का निमंत्रण वापस ले लिया जाना चाहिए। वर्ष 2012 का समझौता सीरिया में सत्ता में बदलाव का समर्थन करता है। अमेरिकी प्रवक्ता जान पास्की ने कहा कि अगर ईरान जेनेवा विज्ञप्ति को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करता तो उसका निमंत्रण रद्द कर दिया जाए।

फ्रांस ने भी अमेरिका के रूख का समर्थन करते हुए कहा है कि अगर ईरान सीरिया में सत्ता परिवर्तन का समर्थन नहीं करता है तो उसे जेनेवा वार्ता में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। फ्रांस के विदेश मंत्री लारेंट फैबियस ने यहां एक बयान जारी करके कहा कि किसी भी ऐसे देश को वार्ता में शामिल नहीं किया जाना चाहिए जो इस घोषणापत्र का विरोध करता हो। इस बीच ईरान ने कहा है कि उसने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव की ओर से मिला वार्ता का न्योता स्वीकार कर लिया है।

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारजिएह अफखाम ने बताया कि ईरान बगैर किसी शर्त के जेनेवा वार्ता में हिस्सा लेने जा रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि वह वार्ता में शामिल होने के लिए कोई शर्त स्वीकार नहीं करेगी। सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद का कहना है कि शांति वार्ता में मुख्य तौर पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई विषय पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जेनेवा सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ लडाई के मसले में स्पष्ट परिणाम निकलने चाहिए। यही सबसे महत्वपूर्ण परिणाम भी होगा।


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