पद्मश्री एक ‘बड़ा सम्मान’ है: सिद्धार्थ मुखर्जी

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Sunday, January 26, 2014-6:08 PM

वॉशिंगटन: भारत में पैदा हुए अमेरिकी चिकित्सक, वैज्ञानिक और लेखक सिद्धार्थ मुखर्जी ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर मिले पद्मश्री को अपने लिए एक बड़े सम्मान की संज्ञा दी है। मुखर्जी ने कहा, ‘‘भारत ने जिस तरह मुझे सम्मान दिया है, वह एक बड़ा सम्मान है।’’

मुखर्जी को वर्ष 2010 में लिखी किताब ‘द एम्परर ऑफ मेलेडिस: अ बायोग्राफी ऑफ कैंसर’ के लेखक के तौर पर अधिक जाना जाता है। इसके लिए उनको पुलित्जर पुरस्कार मिला और गार्जियन से भी एक पुरस्कार हासिल हुआ। कोलंबिया विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर मुखर्जी ने न्यूयॉर्क से आईएएनएस को बताया, ‘‘दवाओं और मानव जीव विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान के लिए मैं कैंसर और स्टेम सेल पर अपना शोध कायम रखूंगा।’’

नई दिल्ली में जन्मे 43 वर्षीय मुखर्जी न्यूयॉर्क शहर के कोलंबिया विश्वविद्यालय के मेडिकल सेंटर में स्टॉफ फिजिशियन के तौर पर कार्यरत हैं। वह रोचेस्टर में मेयो क्लिनिक, मेसाचुसेट्स के जोसेफ गारलैंड लेक्चर और जोसेफ हापकिंस स्कूल ऑफ मेडिसिन के ऑनरेरी विजिटिंग प्रोफेसर हैं।

मुखर्जी की कैंसर पर किताब को टाइम ने 1923 के बाद अंग्रेजी में लिखी गई 100 सबसे प्रभावशाली किताबों में एक बताया था। न्यूयार्क टाइम्स मैग्जीन ने इसे 100 बेहतरीन ‘नॉन फिक्शन’ कृतियों में एक बताया था। रुधिर विज्ञानी मुखर्जी को रक्त के निर्माण और कैंसर कोशिकाओं और बदलाव के जिम्मेदार माइक्रो इन्वायरमेंट में संक्रमण पर कार्य के लिए भी जाना जाता है।

उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता पॉल बर्ग की प्रयोगशाला में भी काम किया। वहां उन्होंने कैंसर कोशिकाओं के व्यवहार में बदलाव के लिए जिम्मेदार कोशिकीय जीनों को परिभाषित करने पर काम किया। मुखर्जी की स्कूली पढ़ाई नई दिल्ली के सेंट कोलंबाज स्कूल में हुई। उनका विवाह सारा जे से हुआ और उनके दो बच्चे हैं।


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