तालिबान को खत्म करने के लिए सैन्य कार्रवाई की जरूरत: जरदारी

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Tuesday, January 28, 2014-8:32 PM

इस्लामाबाद: पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने आज कहा कि तालिबान को खत्म करने के लिए सैन्य कार्रवाई की जरूरत है क्योंकि आतंकवादियों के साथ बातचीत का विकल्प अब खत्म हो चुका है। हाल ही में पाकिस्तानी तालिबान के खिलाफ आवाज बुलंद कर परेशानियां मोल लेने वाले बिलावल ने तालिबान के साथ बातचीत के विकल्प को खारिज कर दिया, हालांकि यहां की मौजूदा सरकार बातचीत के विकल्प पर गौर कर रही है।

भुट्टो परिवार के 25 वर्षीय वारिस बिलावल ने बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘बातचीत हमेशा एक विकल्प रहा है लेकिन हमें मजबूत स्थिति बनानी होगी। आप एक मजबूत स्थिति से किस प्रकार बात करेंगे ? आपको उन्हें युद्ध के मैदान में परास्त करना होगा। वे हमसे लड़ रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि यह आतंकवादी समूहों द्वारा पेश की गयी चुनौतियों के खिलाफ उठ खड़े होने का समय है।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब यहां इस बात की पुरजोर अटकलें लगायी जा रही हैं कि आतंकवादी समूहों, विशेषकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियान की संभावना है। पाकिस्तानी वायुसेना ने पिछले सप्ताह उत्तरी वजीरिस्तान में संदिग्ध आतंकवादी ठिकानों पर बमबारी की थी जो तालिबान और अल कायदा तत्वों का गढ़ माना जाता है। वायुसेना के इन हमलों ने बहुत लोगों को हैरत में डाल दिया था।

पीपीपी अध्यक्ष बिलावल ने कहा कि हम विफल हो रहे हैं क्योंकि देश की बुलंद आवाजें एक के बाद एक दम तोड़ रही हैं । उन्होंने इसके साथ ही कहा कि यदि हम एकजुट होकर काम करते हैं तो तालिबान हमें चुनौती नहीं दे सकेंगे। बिलावल ने बीबीसी से कहा कि उन्होंने सोचा था कि 2007 में उनकी मां (बेनजीर भुट्टो) की हत्या के बाद देश जागेगा लेकिन नेताओं ने उनके परिवार द्वारा बनाए गए आम सहमति के माहौल को समाप्त कर दिया क्योंकि इनमें से कुछ का मानना था कि अमेरिका को उनके लिए तालिबान से लडऩा चाहिए।

उन्होंने कहा कि वार्ता को लेकर देश में आम राय नहीं है और जो भी आम राय पहले बनी थी उसे राजनेताओं ने यह कहकर बर्बाद कर दिया कि यह पाकिस्तान की नहीं अमेरिका की लड़ाई है। बिलावल ने कहा कि वह पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी में और अधिक जिम्मेदारी उठाना चाहते हैं जिसे पिछले चुनाव में करारी हार मिली थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी खुद को राजनीति में नहीं देखा, लेकिन अब, जब मैं अपने देश में हूं और देश की हालत देखता हूं तो महसूस करता हूं कि मैं अपनी भूमिका निभाउ कोई भी भूमिका जिससे मैं अपने देश को शांतिपूर्ण, समृद्ध और तरक्कीपसंद देश बना सकूं जिसका मेरी मां ने सपना देखा था और जिसके लिए लड़ते हुए मेरी मां ने अपनी जान दी।’’


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