सौर और पवन ऊर्जा को संचित करने का सपना होगा साकार

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Sunday, February 02, 2014-6:26 PM

न्यूयार्क: क्या अच्छा होता कि यदि हम सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा को संचित कर रख लेते और बाद में जरूरत पडऩे पर उसका इस्तेमाल कर लेते? यह सपना शीघ्र ही साकार होने वाला है। हावर्ड विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने एक ऐसी बैटरी की संकल्पना तैयार की है जो सौर और पवन ऊर्जा को अत्यंत कम खर्च पर संचित कर सकता है। मूल बैटरी की तरह ऊर्जा को तरल, कार्बनिक मॉलिक्यूल में संचित करता है।

बैटरी तैयार करने वाले दल के प्रमुख हावर्ड स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान के मिशेल अजीज ने कहा, ‘‘इस खास बैटरी की एक दिक्कत कैथोड पक्ष में प्रयोग किया जाने वाला ब्रोमिन और हाइड्रोब्रोमिक तेजाब है। क्योंकि ये पदार्थ संक्षारक हैं, इसलिए ये पर्यावरण पर खतरा उत्पन्न कर सकते हैं।’’ अजीज ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में ब्रोमिन का विकल्प तलाश लिया जाएगा।

अजीज ने आगे बताया, ‘‘अभी तक हमने 100 से ज्यादा चक्रों के बाद क्षय का कोई लक्षण नहीं पाया है, लेकिन व्यावसायिक प्रयोग में हजार चक्रों की दरकार होती है।’’ उपकरण एक फ्लो बैटरी है जिसमें ऊर्जा तरल रसायन के टैंक में संरक्षित रहता है जो बढ़ता या घटता है। रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने वाली वास्तविक बैटरी सेल अलग से होती है। इसका मतलब यह है कि संचय की मात्रा का विस्तार उपकरण की वाट क्षमता बढ़ाए बगैर बढ़ाई जा सकती है।

अभियंताओं ने दशकों पहले फ्लो बैटरी को विकसित कर लिया था, लेकिन उन लोगों ने इसमें वैनेडियम जैसी महंगी धातु का प्रयोग किया। नेचर पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक हावर्ड की टीम ने पादपों में पाए जाने वाले क्यूइनिनेस कहे जाने वाले कार्बनिक मॉलिक्यूल का इस्तेमाल किया और बैटरी के एनोड पक्ष में इसे पानी में भंजित किया।


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