भारत से डांसिंग गर्ल की प्रतिमा वापस चाहता है पाकिस्तान

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Tuesday, February 04, 2014-6:02 AM

इस्लामाबाद: पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी द्वारा मोहन-जोदड़ो पर आयोजित विवादास्पद समारोह ने सिंध की प्राचीन संस्कृति की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। इसी समय पाकिस्तानी अधिकारी भारत से मोहन-जोदड़ो की प्रसिद्ध ‘डांसिंग गर्ल’ की प्रतिमा लौटाने के लिए कहने की योजना बना रहे हैं।

रविवार को डॉन अखबार ने सिंध प्रांत की कैबिनेट के एक सदस्य के हवाले से कहा कि हम देश से निकली अपनी हीरोइन को भारत से वापस लाना चाहते हैं। इसके लिए हम पाकिस्तान की संघीय सरकार को पत्र लिखने जा रहे हैं।

डॉन ने अधिकारियों के हवाले से कहा है कि डांसिंग गर्ल और प्रिस्ट किंग को 1946 में दिल्ली में एक प्रदर्शनी में रखने के लिए ब्रिटिश पुरातत्वविद सर मॉर्टिमर ह्वीलर द्वारा ले जाया गया था।

1947 में विभाजन के बाद पाकिस्तान ने दोनों स्मृति चिन्हों को लौटाने की मांग की थी। रिपोर्ट के मुताबिक एक पाकिस्तानी अधिकारी ने दिल्ली का दौरा किया था और वह किंग प्रिस्ट को वापस लाने में सफल हो गए थे।

यह कहावत बहुत प्रचलित है कि भारतीय अधिकारियों ने दोनों स्मृति चिन्हों को पाकिस्तान को सौंपने से इन्कार कर दिया था और पाकिस्तानी अधिकारियों से प्रिस्ट किंग और डांसिंग गर्ल में से एक को चुनने के लिए कहा था। पाकिस्तानी अधिकारियों ने सोपस्टोन (साबुन बनाने का पत्थर) से बने किंग प्रिस्ट को चुना था।

असल में डांसिंग गर्ल यह 10.8 सेंटीमीटर की कांस्य प्रतिमा है। इसका निर्माण ईसा से 2500 वर्ष पूर्व हुआ था। इस समय यह दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रदर्शन के लिए रखी हुई है। प्रिस्ट किंग के साथ इसे मोहन-जोदड़ो की दो सबसे प्रसिद्ध शिल्पकृतियों में एक माना जाता है। मोहन-जोदड़ो सबसे पुराने योजनाबद्ध शहरों में एक है।


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