‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ में ब्रिटिश सेना की भूमिका सलाहकार की थी

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Tuesday, February 04, 2014-8:19 PM

लंदन: ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने आज संसद को बताया कि 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को निकालने के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ में ब्रिटिश सेना की भूमिका ‘सीमित’ और ‘बिल्कुल सलाहकार की’ थी। हेग ने कहा कि ब्रिटेन ने स्वर्ण मंदिर में चलाए गए वास्तविक अभियान में कोई भूमिका नहीं निभाई।

तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर द्वारा कथित तौर पर ब्रिटिश सहायता मुहैया किए जाने की जांच के निष्कर्ष पर एक बयान में हेग ने कहा, ‘‘रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि ब्रिटेन की सहायता की प्रकृति बिल्कुल सलाहकार की और सीमित थी तथा भारत सरकार को उसकी योजना के शुरूआती चरण में यह (सलाह) मुहैया कराई गई थी।’’

करीब 200 फाइल और 23,000 दस्तावेजों के विश्लेषण से इस बात की पुष्टि हुई है कि ब्रिटिश सेना के एक परामर्शदाता ने 8 फरवरी और 19 फरवरी 1984 के बीच भारत की यात्रा की थी। उनकी यह यात्रा मंदिर परिसर में मौजूद सशस्त्र लोगों के खिलाफ अभियान की रूप रेखा तैयार करने की आकस्मिक योजना पर भारतीय खुफिया सेवा को सलाह देने के लिए हुई थी, जिसमें उस स्थान (स्वर्ण मंदिर) की जमीनी टोह लेना भी शामिल था।

इससे पहले यह खबर आ रही थी कि विलियम हेग 1984 में स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को निकालने के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ की योजना बनाने में अपने देश की कथित संलिप्तता के बारे में आज यहां की संसद को जानकारी देने वाले हैं। हालांकि, ब्रिटेन के सिख संगठन सरकार द्वारा की जा रही जांच की आलोचना कर रहे हैं।

इस ‘ऑपरेशन’ की योजना बनाने में मदद करने में तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर की कितनी भूमिका थी, इस बारे में हेग सांसदों को जानकारी देंगे। ब्र्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने गोपनीय दस्तावेजों को ‘30 साल बाद सार्वजनिक किए जाने के नियम’ के तहत इस घटना से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद जांच के आदेश दिए हैं।

दस्तावेज में कहा गया है कि एलिट स्पेशल एयर सर्विस के एक अधिकारी ने दिल्ली की यात्रा की थी और फरवरी 1984 में आतंकवादियों को निकालने की योजना तैयार करने में भारत सरकार को सलाह दी थी। ब्रिटेन के सिख संगठनों ने ऑपरेशन ब्लूस्टार में ब्रिटेन की कथित भूमिका की जांच की गुंजाइश की आलोचना की है।

कैमरन को लिखे एक पत्र में सिख फेडरेशन यूके के अध्यक्ष भाई अमरीक सिंह ने कहा है कि हम इस बात को लेकर निराश हैं कि समीक्षा की घोषणा किए जाने के तीन हफ्ते बाद और समीक्षा के नतीजों की घोषणा संसद में होने से महज कुछ दिन पहले समीक्षा की शर्तों को औपचारिक तौर पर उपलब्ध कराया गया।

पत्र में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि समीक्षा में काफी कम अवधि पर गौर किया गया और 1984 की दूसरी छमाही की अवधि को इसमें शामिल नहीं किया गया तथा पिछले तीन हफ्तों में ब्रिटेन के कुछ नेताओं द्वारा जताई गई चिंताओं पर गौर नहीं किया गया, जैसे कि प्रवासी सिखों से सहानुभूति को लेकर ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा और अमेरिका के खिलाफ भारत द्वारा प्रतिबंध की धमकी दिया जाना।

लंदन के राष्ट्रीय अभिलेखागार से दो पत्र सार्वजनिक किए गए हैं, दोनों अति गोपनीय और निजी दस्तावेज की श्रेणी में रखे गए थे। एसएएस द्वारा भारतीय अधिकारियों को दी गई सलाह के ब्योरे का इससे खुलासा हुआ है। एक दस्तावेज वह पत्र है जिसे तत्कालीन विदेश मंत्री जीयोफ्री होव के निजी सचिव ने ‘होम ऑफिस’ में अपने समकक्ष पदाधिकारी को लिखा है। इसमें चेतावनी दी गई है कि ऑपरेशन से ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय में तनाव फैल सकता है, खासतौर पर उस वक्त, जब एसएएस की संलिप्तता सार्वजनिक हो जाएगी।

बहरहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इन दस्तावेजों में जिक्र की गई योजना का इस्तेमाल भारत सरकार ने किया या नहीं। ऑपरेशन ब्लू स्टार के कुछ महीने बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने संभवत: बदले की भावना से हमला कर हत्या कर दी थी।


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