पाकिस्तान और तालिबान के बीच पहली बैठक स्थगित

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Tuesday, February 04, 2014-7:39 PM

इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकार और तालिबान के बीच शांति वार्ता के लिए दोनों पक्षों की ओर से गठित समितियों की आज होने वाली पहली बैठक स्थगित कर दी गई। तालिबान के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकारी पक्ष के वार्ताकार ‘दबाव’ में आ गए हैं। सरकार के वार्ताकारों ने कहा कि वे प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की ओर से नामित समिति के सदस्यों से कुछ स्पष्टीकरण चाहते थे। तालिबानी पक्ष के वार्ताकार और ‘तालिबान के जनक’ कहे जाने वाले सैमुल हक ने आरोप लगाया कि सरकार शांति प्रक्रिया को लेकर गंभीर नहीं है।

सरकार की चार सदस्यीय समिति के संयोजक और वरिष्ठ पत्रकार इरफान सिद्दिकी ने हक को सूचित किया कि बैठक को स्थगित कर दिया गया। इससे पहले, सरकार की समिति ने टीटीपी की समिति से दो लोगों के अलग होने के बाद पैदा हुई स्थिति पर चर्चा की। पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता इमरान खान तथा जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम के नेता फजलुर रहमान ने तालिबान की समिति से खुद को अलग कर लिया।

सैमुल हक ने कहा, ‘‘मेरे पास सिद्दिकी का फोन आया कि वे तालिबान के पांच सदस्यों की समिति के साथ बातचीत करना चाहते हैं, न कि तीन सदस्यों के साथ। मैंने उनसे कहा कि हम बातचीत के लिए आए हैं और उन्हें हमसे बातचीत करनी चाहिए।’’ उन्होंने दावा किया कि बातचीत को स्थगित किए जाने से लगता है कि सरकार गंभीर नहीं है।

तालिबान के वार्ताकार ने कहा, ‘‘हमारे दरवाजे हमेशा खुले हुए हैं। हम बातचीत के लिए तैयार हैं और उन्हें हमारे साथ वार्ता करनी चाहिए।’’ सरकारी पक्ष के वार्ताकारों ने फैसला किया कि कुछ बातें स्पष्ट होने के बाद ही दोनों समितियों की बैठक होगी। टीटीपी ने अपनी समिति में कट्टरपंथी मौलवी सैमुल हक, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान खान, लाल मस्जिद के मौलवी अब्दुल अजीज, जमात-ए-इस्लामी के नेता मुहम्मद इब्राहिम और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-एफ के नेता किफायतुल्ला के नाम प्रस्तावित किए थे। इनमें से इमरान और किफायतुल्ला अब तालिबान की समिति का हिस्सा नहीं हैं।


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