अमेरिका ने हक्कानी आतंकवादियों की संपत्ति जब्त की

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Thursday, February 06, 2014-4:48 PM

वॉशिंगटन: अफगानिस्तान में हिंसा और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हक्कानी नेटवर्क पर अमेरिका ने उसके संपत्ति और खातों से लेन देन पर प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिकी कांग्रेस के दवाब में ओबामा प्रशासन ने आज इस फैसले पर हामी भर दी। वित्त मंत्रालय के अधिकारी डेविड एस. कोहेन का कहना है कि हक्कानी नेटवर्क अमेरिकी नागरिकों, सैनिकों और अफगानिस्तान, पाकिस्तान इलाके में अमेरिका के लिए एक बड़ा खतरा है।

उन्होंने कहा, "इस नेटवर्क को तोडऩे या उसे मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगाने का हमें जहां भी मौका मिलेगा, हम वहां कार्रवाई करेंगे।" पाकिस्तान और अफगानिस्ताान के  सीमावर्ती इलाके से आतंक की फैक्ट्री संचालित कर रहे हक्कानी ग्रुप ने अमेरिका नाटो गठबंधन सेना को अपने आतंकी कारनामें से खासा परेशान का रखा है। माना जाता है कि इस समूह का सीमावर्ती क्षेत्र के आदिवासियों के बीच गहरी पैठ है ।

अमेरिकी वित्त विभाग ने अपने बयान में हक्कानी समूह के तीन आतंकवादियों सैयदुल्ला जान, याह्या हक्कानी और मुहम्मद ओमर जदरां को दुनिया भर में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार माना और इनको 'स्पेशली डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेरस्ट्सि' की सूची में शमिल कर लिया है। अमेरिका के इस कदम से अब इस समूह को अमेरिका में आतंकवादी हरकतों के लिये अपना वित्त पोषण और अन्य आर्थिक गतिविधियों से वंचित हो जाएंगे।

अमेरिका ने इन आतंकवादियों को अपने उस खास विश्व सूची में शामिल कर लिया गया है, जिससे उनकी वित्तीय संपत्ति पर रोक लग जाएगी और अमेरिकी नागरिक को इनके साथ किसी तरह के वित्तीय लेन-देन की इजाजत नहीं होगी। अफगाानिस्तान में अमेरिकी सेना किे वरिष्ठ कमांडर जनरल माइक मुलेन ने इस संगठन को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की वास्तविक शाखा करार दिया था, जबकि विदेश विभाग ने इसे 2012 मे विदेशी आतंकवादियों की सूची में शामिल किया था।

ओबामा प्रशासन को यह कारवाई कांग्रेस की खुफिया और विदेशी मामले की स्थाई समित के उस पत्र के बाद करनी पड़ी, जिसमे उनसे पूछा गया था कि आखिरकार अमेरिकी प्रशासन ने आतंकवाद के खिलाफ अपने अभियान में क्या कदम उठाये थे साथ ही समिति ने अभी तक उठाए गए कदम को अपर्याप्त बताया था। अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि हमें इस बात का अंदेशा है कि हक्कानी समूह हमारे सैनिको और प्रतिष्ठानों पर विनाशकारी हमले करने की फिराक में है। अमेरिकी प्रशासन को मिली खुफिया जानकारी के बाद अधिकारियों ने इस संगठन के पर कतरने के लिये अपनी योजना को मूर्त रूप देने का निर्णय लिया है।

अमेरिकी प्रशासन का यह फैसला अफगानिस्तान के साथ होने  वाले द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते 'बीएसए' को लेकर चली आ रहे गतिरोध के बीच आया है। राष्ट्रपति ओबामा ने इस सप्ताह  बीएसए को लेकर अपने वरिष्ठ अधिकारिओं के साथ बैठक की और अफगानिस्तान में 2014 के बाद अमेरिकी सेना की मौजूदगी को लेकर तमाम मसले पर विचार विमर्श किया अफगानिस्तान से अमेरिकी और अंतर राष्ट्रीय सहायता बलों आइएसएएफ की वापसी इस वर्ष के अंत तक प्रस्तावित है।
 


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