शिमला समझौता संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की जगह नहीं लेता: पाकिस्तान

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Thursday, February 06, 2014-7:52 PM

इस्लामाबाद: सभी लंबित मुद्दों पर ‘‘गंभीर वार्ता’’ की इच्छा जताने वाले पाकिस्तान ने आज कहा कि भारत का यह रूख तर्कसंगत नहीं है कि 1972 का शिमला समझौता कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के पूर्व के प्रस्तावों की जगह लेगा। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तसनीम असलम ने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मुझे समझ नहीं आता कि कैसे एक देश यह निर्णय कर सकता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के प्रस्ताव अब वैध नहीं हैं।’’

उन्होंने प्रश्न किया कि एक द्विपक्षीय समझौता ,जो संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की जगह लेने की बात नहीं करता है, कैसे ‘‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के प्रस्तावों को निरस्त’’ कर सकता है। प्रवक्ता ने कहा, कानूनी प्रकिया यह है कि ‘‘यदि पाकिस्तान, भारत और कश्मीरी कश्मीर के मुद्दे पर किसी सहमति पर पहुंचते हैं तो उन्हें उस प्रक्रिया की पुष्टि के लिए प्रस्ताव पारित कराने की खातिर वापस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् जाना होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए इस तर्क का कोई कानूनी आधार नहीं है।’’ प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए ‘‘गंभीर वार्ता’’ चाहता है।


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