वन्यजीव गंध से करते हैं अपनी रक्षा

  • वन्यजीव गंध से करते हैं अपनी रक्षा
You Are HereInternational
Sunday, February 09, 2014-1:57 AM

न्यूयॉर्क: आपने सोचा है कि कुछ वन्यजीव हानिकारक गंधों का प्रयोग क्यों करते हैं, जबकि सामाजिक समूह में रहने वाले अन्य जानवर परभक्षियों से खुद को बचाते हैं। शोधकर्ताओं ने मांसाहारी स्तनधारियों और शिकारी पक्षियों के बीच शिकारी और शिकार की बातचीत के तुलनात्मक अध्यन से इस प्रश्न का उत्तर खोजा।

कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, लॉन्ग बीच के थिओडोर स्टेंकविच ने बताया, ‘‘हम बताने की कोशिश कर रहे हैं कि निश्चित प्रकार के शिकाररोधी लक्षण कुछ प्रजातियों में विकसित हुए, अन्य में क्यों नहीं?’’ स्टेंकविच ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, डेविस के जीवविज्ञानी टिम कारो, भूगोलविज्ञानी पॉल हावरकैंप के साथ 181 मांसाहारी प्रजातियों के ऐसे समूह का आंकड़ा संग्रहीत किया, जिसमें अधिकांश प्रजातियां छोटी थीं, और उन्हें अन्य जानवरों से खतरा था।

शोधकर्त्ताओं ने हर संभव शिकार-शिकारी के संयोजन की तुलना की। उन्होंने पाया कि जानवरों द्वारा हानिकारक छिड़काव किया जो कि रात्रिचर थे और इनमें से अधिकतर को अन्य जानवरों से खतरा था। समूह में रहने वाले जानवर दिन में सक्रिय थे और संभवत: शिकारी पक्षियों से कमजोर थे।

स्टेंकोविच ने बताया, ‘‘अगर आप किसी शिकारी द्वारा हैरान होते हैं तो यह छिड़काव एक अच्छी करीबी रक्षा है, इसलिए रात में जब आप दूर की चीजें नहीं ढूंढ़ सकते, तब संभव है कि आपको परभक्षी मिल जाए।’’ इवोन्ल्यूशन शोधपत्र में प्रकाशित शोध में बताया गया कि सामाजिक जानवर अन्य सदस्यों को चेतावनी की आवाज देने, यहां तकि इकट्ठे होकर घुसपैठिए पर धावा बोलने जैसे अन्य रक्षा उपायों का प्रयोग भी करते हैं।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You