लाहौर के लोगों से मिले प्यार को नहीं भूला जा सकता: मीरा

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Sunday, February 23, 2014-7:17 PM

लाहौर: भारतीय फिल्म निर्माता मीरा नायर ने पाकिस्तान के इस पूर्वी शहर में खुद का गर्मजोशी से स्वागत किए जाने पर कहा है कि यहां के लोगों से मिले प्यार को नहीं भूला जा सकता। मीरा के पिता का जन्म लाहौर में ही हुआ था और वह यहीं पले बढ़े थे। मीरा ने कहा कि यहां आने पर हमेशा ही उनका गर्मजोशी से स्वागत हुआ है। लाहौर के लोगों से मुझे जो प्यार मिला है उसे नहीं भूला जा सकता। वह यहां लाहौर साहित्य उत्सव में शरीक होने आई हैं, जो आज अल हमरा आर्ट्स काउंसिल में संपन्न हुआ।

उन्होंने 2004 में की गई शहर की अपनी पहली यात्रा को याद करते हुए कहा कि उनके पिता ने गवर्नमेंट कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी और ‘‘इस तरह लाहौर मेरे खून में है। ’’ साहित्य उत्सव के दौरान नायर ने थियेटर में अपनी पृष्ठभूमि के बारे में और नई दिल्ली में एक शौकिया अदाकारा के रूप में अपने काम के बारे में बताया। मुंबई की गलियों के बच्चे के बारे में बनी फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ फिल्म की निर्माता ने कहा कि यह उनकी पहली फीचर फिल्म थी जिसके बाद उन्होंने कुछ वृत्तचित्र बनाए। उन्होंने कहा कि उस वक्त वृत्तचित्र बमुश्किल देखे जाते थे। यह कहा जाता था कि यदि आप सोना चाहते हैं तो आप को वृत्तचित्र देखनी चाहिए।

मीरा ने बताया कि उन्होंने सलाम बॉम्बे फिल्म से हुई कमाई का उपयोग बच्चों के लिए एक ट्रस्ट बनाने में किया जिसका नाम ‘सलाम बालक ट्रस्ट’ है। मीरा के अलावा उत्सव में भारतीय डिजाइनर राजीव सेठी और दिल्ली के विश्वज्योति घोष भी शरीक हुए। घोष ने अपनी पुस्तक ‘दिस साइड, दैट साइड :रिस्टोरिंग पार्टिशन’ का भी विमोचन किया।


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