अदालत ने ठुकराई मुशर्रफ की अपील, बढ़ेगी मुश्किलें

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Monday, February 24, 2014-3:20 PM

इस्लामाबाद:  पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने देशद्रोह के मुकदमे की सुनवाई के दौरान कठघरे में खड़े होने से बचने के लिए बीमारी से लेकर सैन्य अदालत तक मामले को ले जाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन वह कामयाब नहीं हुए और अंतत: पूर्व शासक को विशेष अदालत के सामने पेश होना पड़ा।
 
गौरतलब है कि जनरल मुशर्रफ शुक्रवार को विशेष अदालत में पेश हुए। मंगलवार से ही उन्हें पेश नहीं करने की उनके वकील अनवर मंसूर ने बहुत कोशिश की, लेकिन जब विशेष अदालत के जज फैजल अरब ने कड़ा रुख अपनाया तो अनवर भी सकते में आ गए। अदालत के रुख का संदेश मिलते ही मुशर्रफ को अदालत आने के लिए बाध्य होना पड़ा।

वकील ने अदालत को यह कहकर भी मुशर्रफ की पेशी को रोकने का प्रयास किया कि उनके साथ सुरक्षा का मामला जुड़ा है। यह सुनते ही न्यायाधीश ने गृह मंत्रालय को सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के तत्काल निर्देश दिए और आखिर करीब 1200 सुरक्षाकर्मियों की देख-रेख में मुशर्रफ का काफिला अदालत तक पहुंचा।

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार किसी पूर्व सैन्य शासक के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है। विवाद यह है कि जनरल मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा विशेष सिविल अदालत में नहीं, बल्कि सैन्य अदालत में चलना चाहिए। पाकिस्तान में सरकार से ज्यादा ताकतवर सेना है और उसके लिए किसी पूर्व जनरल के खिलाफ कोई मुकदमा सिविल अदालत में चलना नाक का सवाल है।

सेना की ताकत का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि देश के 67 साल के इतिहास में तीन बार सेना का शासन रहा है। इसमें बड़ी बात यह है कि अब तक किसी भी पूर्व जनरल पर देशद्रोह का मामला नहीं चला है।


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