अमेरिका के प्रस्ताव पर राजपक्षे ने हैरानी जताई

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Saturday, March 01, 2014-5:40 PM

कोलंबो: श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे ने आज जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अमेरिका के नेतृत्व में प्रस्ताव लाए जाने की खबर पर हैरानी जताई और कहा कि उन्हें विश्वास था कि विश्व संगठन में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं लाया जाएगा। लंका के राष्ट्रपति ने 2012-13 में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिलइलम (लिट्टे) को पराजित करने के लिए की गई सेना की कार्रवाई के दौरान मानवाधिकारों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन किए जाने के आरोप को निराधार बताया और कहा कि इस संबंध में पश्चिमी देशों की आशंका निर्मूल है।

श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा, "इस संबंध में जो भी शिकायतें आई उनकी हम अपने तरीके से जांच करा रहे हैं और अपने देश में मेल मिलाप की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे है। ऐसी स्थिति में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में इस मामले को लेकर प्रस्ताव लाए जाने का कोई औचित्य नहीं है।"
   
श्रीलंका के विरूद्ध ये प्रस्ताव युद्धाभ्यास मामलों की जांच में उसकी विफलता और मेल-मिलाप की प्रतिक्रिया से सहीं ढंग से लागू नहीं किए जाने को लेकर लाया जा रहा है। अमेरिका इस प्रस्ताव की अगुवाई कर रहा है। अगर यह प्रस्ताव आता है तो संयुक्त राष्ट्र परिषद में श्रीलंका इस बात का प्रयास कर रहा है कि उसके खिलाफ ऐसा कोई प्रस्ताव न आने पाए। श्रीलंका की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन की अध्यक्ष नवी पिल्लई की उस रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया है, जिसमें युद्धापराधों की अंतर्राष्ट्रीय जांच की मांग की गई है।
 


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