क्रीमिया के जनमत संग्रह कराने को अदालत में चुनौती

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Friday, March 07, 2014-6:42 PM

कीव: यूक्रेन के महा अभियोजक कार्यालय ने कीव की एक जिला अदालत में स्वायत्तशासी गणराज्य क्रीमिया की संसद, सुप्रीम काउंसिल के रूस के साथ संबद्ध होने पर जनमत संग्रह कराने के फैसले को चुनौती दी है। प्रेस सर्विस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी है। कार्यालय के प्रेस सर्विस के मुताबिक, सुप्रीम काउंसिल ने अपने फैसले में कानून का उल्लंघन किया है और उसका फैसला यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता पर आघात पहुंचाता है। इसलिए अभियोजन एजेंसी के लिए हस्तक्षेप करना अनिवार्य हो गया है।

6 मार्च को क्रीमिया की सुप्रीम काउंसिल ने मास्को से अपने क्षेत्र को रूसी संघ का हिस्सा बनने की इजाजत देने की मांग की। इस मुद्दे पर क्षेत्र में 16 मार्च को जनमत संग्रह कराया जा सकता है। उधर क्रीमिया की सुप्रीम काउंसिल के जनमत संग्रह के प्रस्ताव पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के गुरुवार के बयान की रूस ने तीव्र निंदा की है। ओबामा ने कहा है कि क्रीमिया का प्रस्तावित जनमत संग्रह यूक्रेन के संविधान और अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। ओबामा ने कहा है कि इसकी जगह क्रीमिया पर कोई फैसला लिए जाने में यूक्रेन की सरकार को भी शामिल किया जाना चाहिए।

रूस ने यूक्रेन के घटनाक्रम के बारे में मास्को के नजरिए पर गुरुवार को अमेरिका पर दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, रूस के विदेश मंत्री के प्रवक्ता अलेग्जेंडर लुकाशेविच ने अपने बयान में कहा, ‘‘यूक्रेन में कट्टरपंथी राष्ट्रवादियों द्वारा उपद्रव भड़काने के प्रचुर सबूत के बावजूद अमेरिकी विदेश मंत्रालय बेशर्मी से घटनाओं की एक पक्षीय व्याख्या करने में जुटा है।’’

लुकाशेविच ने अमेरिकी विदेश विभाग के उस बयान की ओर इशारा किया है जिसमें अमेरिकी सरकार ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि अमेरिकी बयान ‘विस्मयकारी है और पूर्वाग्रही व दोहरे मापदंड की मानसिकता के कारण वास्तविकता के एक पहलू से लिया गया है।’ लुकाशेविच ने कहा है, ‘‘निश्चित रूप से वाशिंगटन यह नहीं समझ सका है कि उसने मैदान (कीव में स्वतंत्रता चौक) का और देश वैधानिक सरकार का तख्ता पलट कर खुद को कीव में वैधानिक सरकार होने का दावा कर रहे हैं, का समर्थन किया है।’’

प्रवक्ता ने दूसरे देश की संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानून का हवाला दिए जाने की अमेरिकी आदत पर निशाना साधते हुए सवाल किया है, ‘‘पूर्व की यूगोस्लाविया पर बमों से हमला या झूठे दावे के आधार पर इराक पर हमला करने का कारण क्या था?’’ रूसी प्रवक्ता ने कहा है कि वाशिंगटन को उसके साथ उलझना नहीं चाहिए और इस तथ्य को ध्यान में रखना चाहिए कि ‘वह हर बात में और हर जगह दारोगा की तरह फरमान जारी नहीं कर सकता।’


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