...मां तो मां होती है न

You Are HereInternational
Sunday, March 09, 2014-2:51 PM

एथेंस: मानवों का अपने बच्चों के प्रति काफी लगाव और स्नेह तो जगजाहिर है और कोई भी मां यह नहीं चाहेगी कि उसके बच्चों पर कभी कोई भी कष्ट आए। मां तो अपने बच्चों के लिए हर पल दुआएं मांगती रहती है। वहीं बच्चे जब तकलीफ में होते हैं तो उनके लबों पर मां शब्द पहले निकलता है। लेकिन अगर हम बात करें जानवरों की तो इनका दिल भी अपने बच्चों के लिए वैसे ही स्नेह और प्यार से भरा होता है जैसे किसी मानवीय दिल में होता है। मां का दिल दिल ही होता है चाहे वो जानवर का हो या किसी मानवीय मां का। 

चाहे हम खुशियों में मां को भूल जाएं लेकिन . . .
जब मुसीबत सर पे आ जाए तो याद आती है मां।

                              
उक्त कथन इस फ़ोटोग्राफ को देखकर सही साबित हो गया। ग्रीस के वन्यजीव फ़ोटोग्राफ़र ने हाल ही में देखा कि एक शेरनी कीनिया के मसाई मारा में अपने बच्चे के साथ एक उफ़नती नदी को पार कर रही है. . . उसने यह दृश्य अपने कैमरे में कैद कर लिया। अपने बच्चे को दांतों में दबाए ये शेरनी नदी के दूसरी ओर अपने परिवार के बाकी सदस्यों से मिलने की कोशिश कर रही थी। इस सब से एक बात तो साफ़ हैं कि जानवर भी अपने बच्चों को जान से ज़्यादा प्यार करते हैं। ऐसा माना जाता है कि शेरनी का हर वो बच्चा जो जन्म लेता है वह एक साल से ज़्यादा जीता है।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You