यूएसआईबीसी ने भारत को प्राथमिकता वाले विदेशी मुल्क का दर्जा देने से किया इंकार

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Monday, March 10, 2014-2:01 AM

वाशिंगटन: शीर्ष अमेरिकी व्यापारिक एडवोकेसी समूह ने ऐसे किसी भी कदम का जोरदार विरोध किया है जिसके तहत भारत को प्राथमिकता वाले विदेशी मुल्का का दर्जा दिया जाएगा। उन्होंने यह कहते हुए इसका विरोध किया है कि भारत सरकार विगत वर्ष बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के मोर्चे पर उठाए गए मुद्दों पर प्रतिक्रियाशील रही है।

यूएस इंडिया बिजनेस काउन्सिल (यूएसआईबीसी) ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों (यूएसटीआर) से कहा है कि वह भारत को प्राथमिकता वाले विदेशी मुल्क का दर्जा दिए जाने के खिलाफ अनुशंसा करता है। प्रभावी फार्मा लॉबीइंग समूह भारत को प्राथमिकता वाले विदेशी मुल्क का दर्जा देने की वकालत कर रहे है। यूएसआईबीसी अध्यक्ष रॉन सोमर्स ने यूएसटीआर से कहा,‘‘यूएसआईबीसी नहीं मानती कि भारत को प्राथमिकता वाले विदेशी मुल्क का दर्जा देने का कोई कानूनी या नीतिगत आधार है।’’

यूएसटीआर लाबीइंग समूह की मांगों पर गौर कर रही है। प्राथमिकता वाले विदेशी मुल्क का दर्जा उन देशों को दिया जाता है जो बौद्धिक संपदा अधिकारों का घोर उल्लंघन करते हैं और उसका अमेरिकी विदेशी प्रतिस्पर्धा पर सर्वाधिक नकारात्मक प्रभाव है।
 


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