मां की ममता नहीं, एक पिता का दुलार जिसे देख भर जाएंगी अापकी आंखें

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Tuesday, March 11, 2014-12:54 PM

बीजिंग: एक मां का अपने बच्चे के प्रति प्यार और ममता के बारे में तो सब जानते हैं। मां और बच्चे के प्यार के आपने बहुत किस्से सुने होंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पिता अपने बच्चे को प्यार नहीं करता। चीन के रहने वाले इस पिता की कहानी सुनकर आप भी आंसु बहाने पर मजबूर हो जाएंगे।

यह कहानी है चीन के शिनचुआन प्रांत में रहने वाले यू झुकांग की जो हररोज अपने बेटे को 18 मील का सफर कराते हैं, लेकिन किसी गाड़ी पर नहीं, बल्कि अपनी पीठ पर पर बिठाकर। 

उनका बच्चा शारीरिक रूप से अक्षम है और वह उसे स्कूल छोड़ने के लिए हर रोज 18 मील का सफर तय करते हैं। बेहद गरीब होने की वजह से वह सरकारी स्कूल में पढ़ता है। कोई भी उसे एडमिशन देने को तैयार नहीं था केवल यहीं स्कूल एडमिशन देने के लिए राजी हुआ।

यू का कहना है कि वह जानते हैं कि उनका बेटा शारीरिक रूप से अक्षम है, लेकिन उसका दिमाग पूरी तरह से ठीक है। वह नहीं चाहते उनका बच्चा वही सब कुछ झेले, जो उन्होंने झेला और अशिक्षित रह जाए।

यू सिंगल पेरेंट हैं। 9 साल पहले ही वह और उनकी पत्नी अलग हो गए थे। उस समय उनका बेटा झिआओ केवल तीन साल का था। उसके बाद उन्होंने फैसला किया कि वह अकेले ही उसकी देखभाल करेंगे।

वह हर रोज सुबह पांच बजे उठ जाते हैं। उसके बाद बेटे के लिए टिफिन तैयार करते हैं, उसे तैयार करते हैं और फिर स्कूल छोड़ने जाते हैं। उसके बाद ‌जीविका के लिए काम। दोपहर में वह उसे लेने भी जाते हैं।


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