अमेरिका ने बंद कराया सीरिया दूतावास, राजदूतों को देश छोडऩे का आदेश

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Wednesday, March 19, 2014-1:01 PM

वॉशिंगटन:  सीरिया में गत तीन वर्ष से जारी हिंसक संघर्ष का कोई समाधान निकलता न देखकर अमेरिका ने वॉशिंगटन स्थित सीरिया के दूतावास और वाणिज्य दूतावास का कामकाज बंद करने और सीरियाई राजूदत तथा अन्य कर्मचारियों को देश छोडऩे का आदेश दिया है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कल यह जानकारी दी। सीरिया मामले के निपटारे के लिए नियुक्त विशेष दूत डेनियल रबिंस्टेन ने कहा, "सीरिया की जनता पर अत्याचार करने वाले वहां के राष्ट्रपति बशर-अल-असद ने सत्ता छोडऩे से इनकार कर दिया है। ऐसी स्थिति में असद सरकार द्वारा नियुक्त राजनयिकों या वाणिज्य दूतावास का अमेरिकी धरती पर काम करना अस्वीकार्य है। अमेरिकी सरकार ने सीरियाई सरकार को यह जानकारी दे दी है कि वह यहां अपने दूतावास को बंद करे और साथ ही ट्राय, मिशिगन, हस्टन और टेक्सास में अपने वाणिज्य दूतावासों का कामकाम बंद करे, लेकिन दूतावास का कामकाज बंद कराने का यह मतलब नहीं है कि सीरिया के साथ राजनयिक संबंध खत्म किए जा रहे हैं।"

सीरिया में गत तीन साल से राष्ट्रपति बशर-अल-असद के खिलाफ हिंसक संघर्ष जारी है। इस संघर्ष में लगभग डेढ लाख लोगों की मौत हुई है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। सीरियाई सरकार पर रासायनिक हथियार खत्म करने का भी अंतरराष्ट्रीय दबाव है।  सीरिया के मुद्दे पर अमेरिका के तल्ख तेवर को पहले रूस ने बातचीत के जरिए खत्म किया था और वहां किया जाने वाला संभावित सैन्य हस्तक्षेप टल गया था, लेकिन यूक्रेन के मसले पर रूस से अमेरिका और यूरोपीय संघ का मनमुटाव खुल कर सामने आ गया है। यहां तक कि रूस पर जी-8 की बैठक में हिस्सा लेने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

राजनीतिक विश्लेषक रूस के साथ संबंधों में आए इस तीखे मोड़ के परिप्रेक्ष्य में सीरिया दूतावास को बंद कराने के मामले को देख रहे हैं। अमेरिका और रूस मिलकर सीरिया का हल ढूंढ रहे थे, लेकिन रूस के साथ बिगड़े रिश्तों के कारण अब यह योजना खटाई में पड़ती दिख रही है।

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन प्साकी ने कहा कि सीरियाई दूतावास का कामकाज बंद कराने का मतलब है कि अब दूतावास के कर्मचारियों को अमेरिका में राजनयिक छूट हासिल नहीं है। राजनयिकों और उनके परिवार को अमेरिका छोडऩे के लिए 31 मार्च तक का समय दिया गया है, जबकि प्रशासनिक विभाग के कर्मचारी 30 अप्रैल तक रह सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने 2011 के बाद सीरिया में अपना राजदूत नियुक्त नहीं किया है।
 


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