पावेल को लेकर अमेरिका ने कहा, 'पर्दे के पीछे नहीं है कोई बड़ी कहानी'

  • पावेल को लेकर अमेरिका ने कहा, 'पर्दे के पीछे नहीं है कोई बड़ी कहानी'
You Are HereInternational
Tuesday, April 01, 2014-5:00 PM

वॉशिंगटन: अमेरिका ने कहा है कि उसकी राजदूत नैंसी पावेल का अचानक दिया गया त्यागपत्र भारत के साथ अमेरिका के संबंधों में नए समीकरण का संकेत नहीं है। साथ ही उसने यह भी कहा कि पर्दे के पीछे कोई ऐसी बड़ी कहानी नहीं है जिसके चलते उन्हें यह पद छोडऩा पड़ा।

अमेरिकी विदेश विभाग की उप प्रवक्ता मैरी हर्फ ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सभी अफवाहें और अटकलें सही मायने में पूरी तरह गलत हैं। वह 37 साल बाद सेवानिवृत्त हो रही हैं और मई के अंत तक अपने घर डेलावेयर लौट रही हैं।’’ उन्होंने यह बात अमेरिकी राजदूत पावेल द्वारा अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति बराक ओबामा को भेजे जाने की घोषणा के बारे में पूछे गये सवालों के जवाब में कही।

मैरी ने कहा, ‘‘मेरे पास इस बात की कोई और जानकारी नहीं है कि उन्होंने अभी का समय क्यों चुना है, लेकिन इसका किसी भी तरह संबंधों मेें चल रहीं बातों से कोई लेना-देना नहीं है। इससे संबंधों में किसी भी तरह के समीकरण का कोई संकेत नहीं मिलता। इसका किसी भी तरह किसी तनाव या किसी हालिया स्थिति से कोई लेनादेना नहीं है। यहां पर्दे के पीछे कोई बड़ी कहानी नहीं है।’’

यह पूछे जाने पर कि चुनाव से सात दिन पहले पावेल के त्यागपत्र से भारत एवं अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों में किसी तरह के नए समीकरण का संकेत मिलता है, उन्होंने कहा, ‘‘समय को लेकर कोई बड़ा रहस्य नहीं है।’’ एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में पावेल (66) ने कल भारत में आम चुनाव के बीच अपना त्यागपत्र सौंपने की घोषणा की थी।

उप प्रवक्ता मैरी ने कहा, ‘‘उन्होंने (पावेल ने) घोषणा की है कि उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति ओबामा को सौंप दिया है जैसा कि पिछले कुछ समय से योजना थी। यह 37 वर्ष के विख्यात करियर का अंत है। वह सेवानिवृत्ति की हकदार हैं। उनके करियर में युगांडा, घाना, पाकिस्तान, नेपाल और भारत की राजदूत का पद तथा अन्य विभिन्न स्थानों पर सेवाएं देना शामिल है, लेकिन मैं ऐसी किसी भी अफवाह को खारिज करना चाहूंगी कि इसका संबंध काफी समय पहले से तय उनकी सेवानिवृत्ति के अलावा किसी अन्य चीज से है।’’

विदेश विभाग की उप प्रवक्ता ने कहा, ‘‘देखते हैं कि वह वास्तव में कब वापस लौटती है और उनकी जगह किस को भेजा जाता है। निश्चित तौर पर भारत और अमेरिका के संबंध किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं हैं। यह बात बेहद महत्वपूर्ण है कि विदेश मंत्री जान कैरी तथा व्हाइट हाउस के विभिन्न अधिकारी इसमें संलग्न हैं। लिहाजा संबंध हमारे राजदूत से कहीं ज्यादा व्यापक हैं। हालांकि वह बहुत प्रशसंनीय और अद्भुत है और फिर मुझे लगता है कि 37 वर्ष के बाद सेवानिवृत्ति की हकदार हैं। ’’

हर्फ ने कहा कि अमेरिका आम चुनाव के बाद नई भारतीय सरकार के साथ काम करने को लेकर उत्सुक है तथा द्विपक्षीय संबंध मजबूत हैं तथा मजबूत बने रहेंगे। मैरी ने कहा, ‘‘विभिन्न मुद्दों पर भारत के साथ हमारे बहुत, बहुत करीबी संबंध हैं, भले ही वह उर्जा हो, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण हो या सुरक्षा मुद्दे हो। "

पावेल की जगह अगले राजदूत के बारे में अभी कोई निर्णय नही किया गया है। अमेरिका ने कहा कि भारत के साथ महत्वपूर्ण भागेदारी जारी रहेगी, भले ही अगला राजदूत किसी को भी बनाया जाए। पावेल के आलोचक देवयानी खोबरागड़े मामले पर दोनों देशों के बीच हाल में हुए राजनयिक गतिरोध को लेकर उनकी भी गलती मानते हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि वे इस समस्या को समझ नहीं पायी और इससे द्विपक्षीय संबंधों में दरार आ सकती थी।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You