ऐसे आदिवासी जो मगरमच्छ भी खा जाते हैं, देखें तस्वीरें

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Saturday, April 05, 2014-12:45 PM

पेरू: दुनिया काफी तरक्की कर चुकी है, टैकनोलजी ने जि़ंदगी जिने के नज़रिए को बदल दिया है परन्तु अभी भी इस संसार में कुछ ऐसे लोग हैं, जो अपने समय से काफ़ी पीछे रह रहे हैं। इन लोगों की तरफ सरकार का बिल्कुल ध्यान नहीं है। यह कुदरत की गोद और जंगल के घरों में रहते हैं।

जिन जानवरों को देखने के लिए हम चिडिय़ाघर आदि जाते हैं यह उन जानवरों के साथ हर दिन दो-चार होते हैं। जिन को देख कर हमारी सांस रुक जाती हैं, यह उन जानवरों को पकड़ कर पका कर खा जाते हैं। जी हां, अमेजन के जंगलों में रहने वाले आदिवासी मगरमच्छ तक को खा लेते हैं। सहूलतों की कमी में यह उन की जि़ंदगी की ख़ुराक है। पेरू बार्डर के साथ लगे आक्र राज्य में 200 से ज़्यादा जनजातिया रहती हैं। इन में हुनी -कुई से ले कर अशानिंका और मदीजा समूह शामिल हैं।

अमेजन में इन समूहों के जि़ंदगी सुनसान जंगलों, अकेलेपन और बिना किसी स्थायी मैडीकल सुविधा से बिना किसी जोखिम से कम नहीं है। अमेजन में इन समूहों के लोगों की जिंदगी सुनसान जंगलों, अकेलेपन और बिना किसी स्थायी मेडिकल सुविधा के आभाव में किसी जोखिम से कम नहीं है। इलाके में मेडिकल की सुविधा ना होने की कीमत कई बार इन्हें अपनों की जान देकर चुकानी पड़ती है। इलाज की सुविधा के लिए लोगों को 10 दिनों का सफर तय करना पड़ता है। इसके लिए भी वो नाव पर निर्भर हैं। इसके साथ ही इन इलाकों में तमाम स्थानीय मुद्दों को लेकर जनजातियों के बीच संघर्ष भी आम है।  स्थानीय सरकारी योजना के तहत इन जनजातियों के लोगों से संपर्क नहीं किया जाता, लेकिन सरकार इस क्षेत्र पर नजर रखती है, ताकि अवैध खनन माफिया और शिकारियों को रोका जा सके।


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