पाक के इस फैसले को लेकर संशय दूर

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Tuesday, October 25, 2016-3:50 PM

इस्लामाबाद: विश्‍व स्तर पर अलग-थलग पड़ चुका पाकिस्तान दिसंबर में भारत में अफगानिस्तान पर होने वाले क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग ले सकता है। अमृतसर में होने वाले हार्ट ऑफ एशिया-इस्तांबुल समूह की इस बैठक में रूस, चीन समेत 14 देशों के विदेश मंत्री और अमरीका सहित 17 देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है।

अफगानी राष्ट्रपति अशरफ गनी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी एक दिवसीय सम्मेलन में मौजूद रहेंगे। उरी में आतंकी हमले और इस्लामाबाद सार्क सम्मेलन का भारत द्वारा बहिष्कार करने के बाद से इस बैठक में पाकिस्तान के शामिल होने को लेकर संशय बना हुआ है लेकिन, एक पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से अखबार द एक्सप्रैस ट्रिब्यून ने इस सम्मेलन से दूर रहने की संभावनाओं को खारिज किया है।

अधिकारी ने बताया कि यह बैठक अफगानिस्तान को लेकर है। ऐसे में इसके बहिष्कार का कोई मतलब नहीं है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि सम्मेलन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज भारत आएंगे या कनिष्ठ स्तर का कोई अधिकारी। अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान लगातार कहता रहा है कि वह अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता लाने के लिए हर तरह का योगदान देने को तैयार है।

इस सम्मेलन में शामिल होने से पूरी दुनिया को एक स्पष्ट संदेश मिलेगा कि अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए पाक अपने पड़ोसी देश में जा सकता है जबकि भारत की मंशा इसके विपरीत है। इस समूह की स्थापना 2011 में की गई थी। पिछले साल पाकिस्तान ने सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भाग लिया था।

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