शोधकर्ताओं का दावा, सोने के कणों से कैंसर का इलाज

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Thursday, August 10, 2017-12:25 AM

लंदन: सोने के सूक्षम कणों से कैंसर के प्रभावी उपचार में मदद मिल सकती है। एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह दावा किया है। उन्होंने पाया है कि बेशकीमती धातु के सूक्षम कणों (नैनी पार्टिकल) से युक्त एवं चिकित्सा उपकरण फेफड़े के कैंसर की दवा के प्रभाव को बढ़ा सकता है जबकि इसके सम्भावित नुक्सान को कम कर सकता है। 

दुष्प्रभाव से राहत 
ब्रिटेन की एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकत्र्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि सोने के सूक्षम कणों ने फेफड़े की कैंसरग्रस्त कोशिकाओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की प्रभावशीलता में बढ़ौतरी की। शोधकर्ताओं ने कहा यह मौजूदा कीमोथैरेपी के दुष्प्रभावों को कम करने में मददगार हो सकता है। अहम यह है कि यह उपकरण स्वस्थ उत्तकों को कोई नुक्सान पहुंचाए बिना केवल कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को निशाना बनाता है। सोना एक सुरक्षित रासायनिक तत्व है। इसमें रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने या उत्प्रेरित करने की क्षमता होती है। शोधकर्ताओं ने इस बेशकीमती धातु के उन गुणों की खोज की जिनके जरिए इसकी उत्प्रेरक क्षमताएं किसी जीवित चीज तक बिना किन्हीं दुष्प्रभावों के पहुंचाई जा सकती हैं। 

जैब्राफिश पर प्रयोग 
शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने सोने के सूक्ष्म कणों को एक रासायनिक उपकरण में डाला। फिर वे स्टीक स्थानों में अत्यंक विशिष्ट प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में सफल रहे। इस उपकरण को जब एक जैब्राफिश के मस्तिष्क में प्रत्यारोपित किया गया तब इसने उसमें एक निर्दिष्ट रासायनिक प्रतिक्रिया को उत्प्रेरित किया। जैब्राफिश मीठे जल में रहने वाली मछली है। प्रयोग में स्पष्ट हुआ कि इस उपकरण का संजीवों में इस्तेमाल किया जा सकता है। 

दवाओं का सहयोगी 
इसके बाद शोधकर्ताओं ने सोने के सूक्षम कणों वाले इस रसायनिक उपकरण के कैंसररोधी दवाअओं पर असर की जांच की। उन्होंने प्रयोगशाला में फेफड़े की कैंसरग्रस्त कोशिकाओं पर इसका इस्तेमाल किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि उपकरण ने कैंसर रोधी दवाओं की प्रभावशीलता बढ़ा दी थी। 

सोना बेहतर उत्प्रेरक 
-सोना में रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज या उत्प्रेरित करने की क्षमता होती है। 
-शोधकर्ताओं ने उसके इस गुण से संजीवों में रासायनिक प्रतिक्रिया की गति बढ़ाई।
-इस तरह शोधकर्ता कैंसर रोधी दवाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने में कामयाब हुए। 

भविष्य की उम्मीद 
शोधकर्ताओं ने कहा कि इंसानों के लिए भी ऐसा उपकरण बनाने की उम्मीद बढ़ गई है जिसे सर्जन मरीज में प्रत्यारोपित करके कीमाथैरेपी का सीधे कैंसर कोशिकाओं पर भी इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे वे स्वस्थ कोशिकाओं को बचा सकेंगे। यह अध्ययन एजोवाइटे केमी जनरल में प्रकाशित हुआ है। 

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