दुनिया के लिए सिरदर्द बनेंगे ट्रंप के ये 5 खतरनाक फैसले

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Wednesday, December 06, 2017-5:21 PM

वॉशिंगटनः अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  सत्ता संभालने के बाद से ही विवादों में घिरे हुए हैं। उन्हें राष्ट्रपति  बने अभी एक साल भी नहीं हुआ है, लेकिन उनके द्वारा लिए फैसले अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सिरदर्द पैदा करते जा रहे हैं। नया फैसला  इस्राइल को लेकर है। राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार को येरूशलम को ईस्राइल की राजधानी के रूप में स्वीकार कर सकते हैं।  इस खबर के आते ही वैश्विक मंच खासकर खाड़ी देशों में तनाव का माहौल बन गया है।

सऊदी अरब के सुल्तान सलमान,फलस्तीनी नेता महमूद अब्बास, जॉर्डन के सुल्तान अब्दुल्ला और मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुलफतह अल सिसी ने आशंका जताई कि ऐसा होने पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हालात बिगड़ सकते हैं। गौरतलब है कि येरूशलम,  ईस्राइल और फलस्तीनियों के बीच विवाद का सबसे गंभीर मुद्दा है। अगर अमरीका येरूशलम को  ईस्राइल की राजधानी के रूप में स्वीकार करता है तो वो  ईस्राइल के जन्म के बाद यानी 1948 के बाद ऐसा करने वाला पहला देश होगा।
इसके अलावा ट्रंप के ये 5 अन्य खतरनाक  फैसले हैं जिनके भविष्य में वैश्विक स्तर पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। 

उत्तर कोरिया से टक्कर
पिछले कई महीनों से छोटा सा गरीब देश उत्तर कोरिया अमरीका को लगातार उकसा रहा है, और अमरीका भी उसे सबक सिखाने के मूड में है। उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच तनातनी का असर पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।अगर अमरीका   उसके साथ युद्ध करता है तो अन्य देश भी इसके चपेट में आएंगे। हाल ही में उत्तर कोरिया के इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईबीएम) के नए टैस्ट को अमरीकी रक्षा मंत्री ने दुनिया के लिए खतरा बताया था। इससे पहले सितंबर में ही उसने अपना अब तक का सबसे बड़ा परीक्षण(छठा परमाणु परीक्षण) किया था।उत्तर कोरिया को लेकर ट्रंप की नाराजगी जगजाहिर है और उसे ऐसा नरक बताया जहां किसी को भी नहीं रहना चाहिए।
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यूनेस्को से किनारा
अक्तूबर में  ट्रंप ने यूनेस्को से हटने का फैसला लेकर एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दियाथा।  तब यूनेस्को पर ' ईस्राइल विरोधी' होने का आरोप लगा अमरीका ने  इसका साथ छोड़ दिया।उसने यूनेस्को पर पक्षपात के आरोपों के अलावा संगठन के बढ़ते हुए आर्थिक बोझ को लेकर चिंता लाते हुए इसमें सुधार करने की जरूरत बताई थी। यूनेस्को पूरी दुनिया में विश्व धरोहर स्थल चुनने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा यह एकबहुपक्षीय संस्था है जो शिक्षा और विकास से जुड़े लक्ष्यों (सैक्स एजुकेशन, साक्षरता और महिलाओंकी बराबरी) के लिए काम करता है।
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पेरिस समझौता
साल के मध्य में राष्ट्रपति ट्रंप का पर्यावरण संतुलन के लिए किए गए पेरिस समझौते से अमरीका के हटने की घोषणा करना दुनिया को चौंकाने वाला था।पेरिस समझौता वैश्विक स्तर पर पहला व्यापक जलवायु परिवर्तन समझौता है, 2015 में दुनियाभर के नेताओं के बीच यह सहमति बनी थी, जिसके तहत वैश्विक औसत तापमान बढ़ोतरी दो डिग्री सेल्सियस से नीचे लाना था।ऐसा करने के लिए दुनियाभर के देशों ने कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने का वादा किया अमरीका की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सितंबर 2016 में इस पर हस्ताक्षर किया था। अमरीका कार्बन के सबसे बड़े उत्सर्जक देशों में से एक है और उसके हटने से हो सकता है कि अन्य देश भी ऐसा ही रुख अपनाएं।ऐसा होने पर पर्यावरण को संतुलित रखने केअभियान पर व्यापक असर पड़ सकता है। 

मुस्लिम देशों पर ट्रैवल बैन
ट्रंप का एक और विवादित फैसला 6 मुस्लिम देशों चाड, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सीरिया और यमन के लोगों को अमरीका आने पर प्रतिबंध  लगाना रहा। इसी साल जनवरी में सत्ता में आने के बाद उन्होंने यात्रा प्रतिबंध संबंधी विवादास्पद नीति का प्रारूप जारी किया था। हालांकि इस फैसले का न सिर्फ उनके देश में विरोध हुआ बल्कि पूरी दुनिया में भी इसकी आलोचना हुई।अब अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने भी 6 मुस्लिम देशों के खिलाफ यात्रा प्रतिबंध के राष्ट्रपति ट्रंप केफैसले पर रजामंदी देते हुए इसे पूरी तरह लागू करने का निर्देश दे डाला है।
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मैक्सिको दीवार
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान कई बार मैक्सिकन सीमा पर दीवार बनाने का वादा किया था और अब वह इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। शपथ लेने के कुछ ही दिनों के अंदर उन्होंने दीवार बनाने के कार्यकारी आदेश पर साइन भी कर दिया था। दीवार बनाने को लेकर ट्रंप ने कहा था कि अमरीका की दक्षिणी सीमा पर संकट के हालात हैं और ऐसा करने से अवैध तरीके से घुसपैठ और नशीली दवाओं की तस्करी पर अंकुश लगेगा।

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