मॉडलिंग, रैम्प और विज्ञापनों के बाद फिल्में सुंदरियों का अगला कदम होती हैं। यही वजह है कि सौंदर्य प्रतियोगिताओं तथा मॉडलिंग से फिल्मों की ओर रुख करने वाली बालाओं की लिस्ट बड़ी लंबी है। इसी लिस्ट में नया नाम है ‘जन्नत 2’ से बॉलीवुड के पर्दे पर जोरदार एंट्री करने वाली मॉडल टन्र्ड अभिनेत्री ईशा गुप्ता। खास बात यह है कि मिस इंडिया इंटरनैशनल का ताज जीतने और मिस इंटरनैशनल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली ‘किंगफिशर गर्ल’ ईशा ने जहां सीक्वेल फिल्मों के जरिए बॉलीवुड में एंट्री ली, वहीं उनके खाते में कई अन्य सीक्वेल फिल्में भी हैं। पेश है, ईशा से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
*क्या यह सच है कि आपके खाते में कई अन्य सीक्वेल फिल्में भी हैं?
—हां, यह बात बिल्कुल सच है। जहां मैंने ‘जन्नत 2’ के जरिए हिंदी फिल्मों में कदम रखा है, वहीं मैं ‘जिस्म-2’, ‘राज-3’ जैसी सीक्वेल फिल्में भी कर रही हूं। हालांकि इन सीक्वेल फिल्मों के साथ ही ‘चक्रव्यूह’ जैसी फिल्म भी कर रही हूं यानी आप कह सकते हैं कि ‘जन्नत 2’ की कामयाबी ने मेरे लिए हिंदी फिल्मों के द्वार खोल दिए हैं।
*‘जन्नत 2’ भले ही आपकी डेब्यू फिल्म बन गई है, लेकिन आपने शुरूआत तो किसी अन्य फिल्म से की थी?
—जी हां, मैं अपने फिल्मी करियर की शुरूआत ‘हम, आप और प्यार’ नाम की फिल्म से करने जा रही थी, जिसके हीरो थे उपेन पटेल लेकिन वह फिल्म अब तक अधर में ही लटकी है। आप कह सकते हैं कि अपने करियर की शुरुआत में ही शापग्रस्त होने से मैं बच गई।
*‘जन्नत 2’ के हिट होने के बाद क्या बदलाव महसूस करती हैं?
—‘जन्नत 2’ के हिट होने के बाद मेरे प्रति इंडस्ट्री का रवैया पूरी तरह बदल गया है। मुझे लगता है हिट फिल्म देने के बाद लोग मुझ पर भरोसा करने लगे हैं। लेकिन मंै काफी सोच-समझ कर ही फिल्में साइन कर रही हूं, क्योंकि कामयाबी के बावजूद मेरे पांव जमीन पर ही हैं। मुझे यह भी अच्छी तरह पता है कि पहली फिल्म के हिट होने के बाद दूसरी फिल्म ज्यादा बड़ी चुनौती बन जाती है। मैं उस चुनौती के लिए तैयार भी हूं।
*‘राज 3’ में भी आप एक बार फिर इमरान हाशमी के साथ हैं। उनकी स्मूच ब्वॉय वाली इमेज से आपको दिक्कत नहीं हो रही है?
—नहीं, क्योंकि इमरान की इमेज भले ही मीडिया ने स्मूच ब्वॉय की बना दी हो, लेकिन वह बहुत अच्छे एक्टर हैं। उनकी शुरूआती फिल्में ‘जहर’ और ‘लम्हे’ देखिए, कितना मेच्योर्ड अभिनय किया है उन्होंने। जहां तक किसिंग सीन्स का सवाल है, ऐसे सींस कहानी के हिसाब से ही होते हैं। ऐसी स्थिति में एक कलाकार होने के नाते भला मुझे क्यों दिक्कत होगी।
*लेकिन ‘राज-3’ में बिपाशा बसु के साथ टक्कर को लेकर मन में आशंका तो होगी ही?
—बिल्कुल नहीं क्योंकि फिल्म में बिपाशा बसु हैं जरूर लेकिन लीड भूमिका में तो मैं ही हूं। बिपाशा फिल्म में नैगेटिव किरदार निभा रही हैं। वैसे, बिपाशा से मेरा कोई कॉम्पीटीशन नहीं होने वाला है। हालांकि इसमें कोई शक नहीं है कि वह बड़ी स्टार हैं लेकिन मैं उनसे मुकाबला करने के बदले उनसे काफी कुछ सीखने पर जोर दूंगी।
*‘चक्रव्यूह’ में काम करने का मौका कैसे मिला?
—फिल्म के कास्टिंग निर्देशक ने मुझ से संपर्क किया और कहा कि प्रकाश सर मुझसे मिलना चाहते हैं। इसके बाद मैं उनसे मिली, तो उन्होंने अपनी फिल्म में यह भूमिका निभाने का आदेश दिया और स्क्रिप्ट की कॉपी पकड़ा दी लेकिन मैंने बिना पटकथा सुने ही फिल्म के लिए हामी भर दी थी, क्योंकि प्रकाश झा जैसे फिल्मकार की फिल्म में छोटी से छोटी भूमिका भी पूरा असर छोड़ती है। यह नक्सल आंदोलन की पृष्ठभूमि पर आधारित एक उद्देश्यपूर्ण फिल्म है।
*क्या एक्टिंग में आना ही आपका मकसद था?
—नहीं, मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन एक्ट्रैस बनूंगी। बचपन में मेरी दिलचस्पी वकील बनने में थी। जब बड़ी हुई तो लिखने में मेरी दिलचस्पी जागी।