बॉलीवुड में साल-दर-साल ब्यूटी क्वींस अपनी किस्मत आजमाने आती रही हैं लेकिन अगर हम ऐश्वर्य राय और प्रियंका चोपड़ा जैसे कुछ नामों को छोड़ दें तो यहां आमतौर पर ब्यूटी क्वींस अपना परचम लहरा पाने में नाकाम ही रही हैं। बल्कि इंडस्ट्री में एक धारणा-सी बन चुकी है कि यहां ब्यूटी क्वींस कामयाब हो नहीं सकतीं। ऐसे में जब मिस श्रीलंका रह चुकीं जैकलीन फर्नांडीज ने बालीवुड में कदम रखा तो जाहिर है कि उन्हें सीरियसली नहीं लिया गया। उनकी पहली फिल्म ‘अलादीन’ बॉक्स आफिस पर असफल रही। उसके बाद फिल्म ‘हाऊसफुल’ के आइटम नम्बर ‘धन्नो’ ने उन्हें काफी चर्चा दिलाई। फिर ‘मर्डर-2’ तथा ‘हाऊस फुल-2’ में भी उन्होंने किरदार निभाए। अब उनके खाते में ‘रेस-2’ तथा ‘टोटल धमाल’ जैसी फिल्में हैं। पेश हैं उनसे एक बातचीत के अंश :
*बालीवुड में तो आपका न कोई गॉडफादर, न कोई बैकिंग है, ऐसे में राह आसान तो नहीं रही होगी?
—जब मैंने शुरूआत की तो मैं लक्की रही कि इंडिया आने के एक महीने के अंदर ही मुझे ‘अलादीन’ मिल गई। मेरे ख्याल में अक्सर नए कलाकारों को पहली फिल्म आसानी से मिल जाती है क्योंकि इंडस्ट्री के लोग और दर्शक नया चेहरा देखना चाहते हैं। इंडस्ट्री के दरवाजे फ्रैश चेहरों के लिए हरदम खुले रहते हैं। मैं खुद को खुशकिस्मत समझती हूं कि मुझे यहां ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा।
*क्या आपको कभी ख्याल आया कि अगर बड़े बैनर्स या एक्टर्स के साथ आप शुरूआत करतीं तो बात कुछ और होती?
—अगर मैं कहूं कि मैं इनसे बेहतर फिल्में चाहती थी तो यह बड़ी नाशुक्री वाली बात होती। ‘अलादीन’ मेरे लिए बहुत ही अहम फिल्म है क्योंकि इसमें मुझे अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिला। फिल्म का हश्र जो भी रहा हो, पर मेरे लिए इससे बेहतर शुरूआत हो ही नहीं सकती थी। आगे चलकर मैं कह सकती हूं कि मैंने इंडिया के ग्रेट एक्टर अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म की है। न्यूकमर के लिए सपने जैसा ही है यह।
*क्या यह सच है कि आप आइटम नम्बर्स करने से झिझक रही हैं?
—मैं सिर्फ आइटम नम्बर्स नहीं करती रहना चाहती बल्कि एक्टिंग में करियर बनाना चाहती हूं। मैं यह सोचकर इस इंडस्ट्री में नहीं आई हूं कि ढेर सारे आइटम नम्बर करूंगी। ‘धन्नो’ के बारे में मैं जानती थी क्योंकि यह अमिताभ बच्चन की एक फिल्म के सुपरहिट गीत का रीमिक्स था। पहले मेरा इरादा यह आइटम नम्बर करने का नहीं था। पर साजिद और फराह ने मुझे इसके लिए राजी कर लिया।
*आज टॉप की हीरोइनें बिकिनी पहन रही हैं, किसिंग सीन कर रही हैं, क्या आपने कुछ हदें तय कर रखी हैं?
—ऐसा नहीं है। एक एक्ट्रैस के तौर पर सबसे अहम होता है फिल्म को बेहतर से बेहतर बनाना। लिहाजा अगर कोई चीज फिल्म के लिए बेहतर लगती है तो मैं डायरैक्टर से यह नहीं कह सकती कि मैंने एक हद बना रखी है और मैं उससे आगे नहीं जा सकती। आपकी कोशिश होनी चाहिए कि दर्शक जो कुछ पर्दे पर देखें उस पर उन्हें यकीन हो। बस सीन में अश्लीलता या भद्दापन न हो।