चुनाव प्रचार: तेवर नया, कलेवर नया, फ्लेवर नया

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Friday, March 28, 2014-1:26 PM

जम्मू: शापिंग करते समय यदि कोई महिला भगवा रंग की साड़ी पहने नजर आए, तो आप चौंकिएगा नहीं। उसकी साड़ी के पल्लू पर बड़े-बड़े कमल के फूल भी बने दिखाई दें तो यह मत समझना कि वह किसी क्षेत्र की भाजपा प्रत्याशी है। वह भाजपा की समर्थक मतदाता हो सकती है।

इसी तरह किसी महिला के गले में पड़े मंगलसूत्र के लॉकेट में यदि कांग्रेस का पंजा चमक रहा हो या लेडीज बैग पर अरविंद केजरीवाल मुस्कुरा रहे हों, तो समझ लीजिए चुनाव प्रचार के बदलते ट्रेंड की बयार किस दिशा में बह रही है। चुनाव प्रचार की सामग्री बेचने वाले दिल्ली के थोक बाजारों में आजकल इसी तरह के आइटम बिकते नजर आ रहे हैं। यही नहीं, सदर बाजार या चांदनी चौक के कुछ दुकानदार तो राजनीतिक दलों के ऑर्डर पर विशेष माल तैयार करवा रहे हैं।
 
गर्ग का कहना है कि चुनावों के दौरान इस तरह की डिमांड एडवांस पैसे लेकर पूरी की जाती है। पहले ऐसा नहीं होता था। लेकिन चुनाव बाद व्यापारी को अपने पैसे निकालना मुश्किल हो जाता है। यदि कोई नेता चुनाव हार जाता है, तो वह व्यापारी के सामने अपनी हार का दुखड़ा लेकर बैठ जाता है। यदि जीत जाता है, तो उससे मिलना ही संभव नहीं हो पाता। लिहाजा, व्यापारी थक-हार कर घर बैठ जाता है।

सदर बाजार या चांदनी चौक के बाजारों में इन दिनों देर रात तक चहल-पहल देखी जा सकती है। लगभग सभी थोक कपड़ा व्यापारी, व्हीकल एसेसरीज, लैदर आइटम व्यापारी, इलैक्ट्रॉनिक सामान के व्यापारी, प्रिंटर्स, कॉस्मेटिक एवं आर्टिफिशियल ज्वैलरी का सामान बेचने वाले दुकानदार अपने कर्मचारियों के साथ ‘ओवर टाइम’ कर रहे हैं।

यहां कोई साडिय़ों पर कमल या साइकिल प्रिंट करा रहा है, तो कोई मफलर या साफे पर केजरीवाल व झाड़ू छपवाने में बिजी है। माथे पर लगाने वाली बिंदियों का ऑर्डर तो थोक में है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में ‘कुटीर उद्योग’ की तर्ज पर हेयरबैंड-क्लिप में विभिन्न पार्टियों के छोटे-छोटे स्टिकर लगाए जा रहे हैं, जिन्हें घरेलू महिलाएं अंजाम देकर आमदनी भी प्राप्त कर रही हैं। 
 

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